September 8, 2026

भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 75,577 और निफ्टी 23,635.10 अंक पर बंद हुआ

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नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कमजोरी रही। कारोबार के अंत में निफ्टी 50 में 0.61 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

एनएसई निफ्टी 50 मंगलवार को 144.05 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,635.10 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स 555.23 अंक यानी 0.73 प्रतिशत टूटकर 75,577 के स्तर पर पहुंच गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार में कुछ मजबूती देखने को मिली।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसी तरह निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी 0.12 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। यानी प्रमुख बेंचमार्क में दबाव रहने के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सीमित तेजी बनी रही।

सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे अधिक कमजोरी रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.98 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 0.93 प्रतिशत गिरा। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।

दूसरी तरफ कुछ सेक्टरों ने बाजार में मजबूती बनाए रखने का काम किया। निफ्टी मीडिया इंडेक्स में 1.31 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि निफ्टी फार्मा 0.77 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.63 प्रतिशत बढ़ा। निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल्स में भी बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मेटल इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ।

एक मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, अप्रैल में मिडकैप और मार्च में स्मॉलकैप शेयरों के 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इन दोनों सेगमेंट ने करीब 20 से 30 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दिया है। इस तेजी के पीछे घरेलू निवेश में सुधार और कम कीमत पर बेहतर शेयरों की खरीदारी को प्रमुख कारण बताया गया।

एक्सपर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक आर्थिक मंदी, ऊंची महंगाई और व्यापार शुल्क जैसी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कंपनियों की कमाई को लेकर बनी चिंताओं में कमी आई थी। वहीं पहली तिमाही के नतीजों से कॉरपोरेट कमाई में सुधार के संकेत भी मिले हैं।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से कमाई में सुधार की उम्मीदों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। एक्सपर्ट ने कहा कि चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रह सकती है, लेकिन बाजार में अभी भी काफी उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। ऐसे माहौल में अल्पकालिक निवेशकों के लिए कुछ मुनाफा बुक करना समझदारी भरा कदम हो सकता है।

पिछले पांच-छह महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के शानदार प्रदर्शन को आगे भी बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा है। रणनीतिक नजरिए से लार्जकैप शेयरों और नॉन-इक्विटी ईटीएफ पर अधिक ध्यान देना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प बताया गया है। सेक्टर के स्तर पर हेल्थकेयर, टेलीकॉम और एफएमसीजी पर ध्यान देने की बात कही गई है।

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