दिल्ली में भवन गिरने की घटनाओं में कमेंटियां बनी, जांच हुई, पर जवाबदेही अब तक तय नहीं… MCD की व्यवस्था पर उठे सवाल
नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi) में भवन गिरने के हादसों (Building Collapse Accidents) के बाद जांच समितियां (Inquiry Committees) गठित करने और रिपोर्ट तैयार करने का सिलसिला पुराना है। जांच रिपोर्टों में कई बार एमसीडी की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे और अधिकारियों की लापरवाही सामने आई, लेकिन हर मामले में कार्रवाई का परिणाम एक जैसा नहीं रहा। कहीं अधिकारियों को निलंबित किया गया, कहीं विभागीय कार्रवाई शुरू हुई और कहीं पूरी जिम्मेदारी से ही मुक्त कर दिया गया। इससे हादसों के बाद जवाबदेही तय करने की एमसीडी की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
27 सितंबर 2011 को चांदनी महल में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत और 23 लोग घायल हुए। एमसीडी की जांच रिपोर्ट में अनधिकृत निर्माण और भवन की उम्र से संरचना कमजोर होने की बात सामने आई। रिपोर्ट में आठ एमसीडी अधिकारियों को अनधिकृत निर्माण की अनुमति देने का दोषी माना गया और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। रिपोर्ट में 30 साल से अधिक पुरानी इमारतों के लिए संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र अनिवार्य करने और खतरनाक भवनों की पहचान के लिए नीति बनाने की सिफारिश भी की गई।
तीन दिसंबर 2011 को उत्तम नगर में भवन गिरने से चार लोगों की मौत हुई। जांच में सामने आया कि पड़ोसी भूखंड में नींव के पास की गई खोदाई से ढांचे की नींव प्रभावित हुई थी। एमसीडी आयुक्त ने भवन विभाग के सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर सतर्कता जांच के आदेश दिए। वहीं 30 मार्च 2012 को करोलबाग के प्रसाद नगर में भवन गिरने से चार लोगों की मौत हुई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच में विशेषज्ञों ने हादसे का मुख्य कारण कमजोर संरचनात्मक डिजाइन और कंक्रीट की अपर्याप्त मजबूती बताया। आयोग ने एमसीडी अधिकारियों की लापरवाही, निष्क्रियता और निर्माण रोकने में विफलता को स्पष्ट रूप से दर्ज किया।
18 जुलाई 2015 को विष्णु गार्डन में भवन गिरने से पांच लोगों की मौत हुई। शुरुआत में एमसीडी ने सीवर लाइन से रिसाव को नींव कमजोर होने का कारण बताया और तीन अभियंताओं को निलंबित किया। बाद की जांच में दो या उससे अधिक अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण को लेकर भवन विभाग के जेई, एई और ईई को प्रथमदृष्टया लापरवाही और कर्तव्य में चूक के लिए जिम्मेदार माना गया। हालांकि अतिरिक्त मंजिलें किस अवधि में बनीं, यह निश्चित नहीं हो सका, इसलिए सतर्कता विभाग को आगे जांच की जिम्मेदारी दी गई।
13 सितंबर 2021 को सब्जी मंडी-मलकागंज में भवन गिरने से दो बच्चों की मौत हुई। एमसीडी की तीन सदस्यीय जांच समिति ने उपायुक्त और तीन अभियंताओं समेत चार अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार भवन को पहले खतरनाक घोषित नहीं किया गया था। वहीं 30 मई 2026 को सैदुल्लाजाब में भवन गिरने से छह लोगों की मौत हुई और 14 लोग घायल हुए। मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट में हादसे को रोके जा सकने योग्य बताया गया। रिपोर्ट में अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने, शिकायतों पर ध्यान न देने और निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए।
