September 8, 2026

यमन में जेल पर एयरस्ट्राइक का दावा, 7 की मौत, हूतियों ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार

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नई दिल्ली। यमन में सोमवार को एक जेल पर कथित हवाई हमले के बाद तनाव बढ़ गया। हूती विद्रोहियों ने इस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है। हूतियों के मुताबिक, उत्तरी यमन के जौफ प्रांत में हुए हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई है, इनमें एक बच्चा भी शामिल है। वहीं, 7 अन्य लोग घायल बताए गए हैं, जिनमें एक महिला शामिल है।

हमला जौफ प्रांत के हज्म शहर स्थित सेंट्रल करेक्टिव फैसिलिटी पर होने का दावा किया गया है। हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इमारत के मलबे में 35 कैदियों और अपने पति से मिलने पहुंची एक महिला के दबे होने की आशंका है।

हूती मीडिया ने हमले के बाद के दृश्य भी प्रसारित किए हैं। फुटेज में क्षतिग्रस्त इमारत, चारों ओर बिखरा मलबा और राहत एवं बचाव दल के सदस्य तलाशी अभियान चलाते दिखाई दे रहे हैं।

हूती प्रवक्ता ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने जौफ में एयरस्ट्राइक कर ‘नरसंहार’ किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा और सऊदी अरब को इसकी कीमत चुकानी होगी।

सरी ने बाद में यह भी दावा किया कि पिछले 24 घंटे में हूती बलों ने सऊदी अरब के चार टोही ड्रोन मार गिराए हैं। हालांकि, इन आरोपों और दावों पर सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

कई इलाकों में आगे बढ़ रही सरकारी सेना

जेल पर हमले के ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के प्रति वफादार बल कई मोर्चों पर आगे बढ़ने का दावा कर रहे हैं। इनमें जौफ के अलावा बैदा, दहले और मारिब के इलाके शामिल हैं।

यमन का गृहयुद्ध 2014 में उस समय शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को देश छोड़ना पड़ा। वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

जेलों को पहले भी बनाया जा चुका है निशाना

यमन के संघर्ष में जेल और हिरासत केंद्र पहले भी हवाई हमलों का शिकार हो चुके हैं। 2022 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के एक हमले में सादा की एक डिटेंशन फैसिलिटी में कम से कम 87 कैदियों की मौत हुई थी।

इससे पहले 2019 में धमार में हूतियों द्वारा संचालित डिटेंशन फैसिलिटी पर हमले में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

डेढ़ लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान

संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक यमन के लंबे समय से जारी संघर्ष में अब तक कम से कम 1.5 लाख लोगों की जान जा चुकी है। युद्ध की वजह से देश गंभीर मानवीय और खाद्य संकट की ओर भी धकेला गया है।

वर्ष 2022 से बड़े स्तर पर कायम युद्धविराम अब कमजोर पड़ चुका है और अलग-अलग मोर्चों पर जारी सैन्य गतिविधियों के बीच यमन में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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