September 8, 2026

ट्रंप की रेटिंग ऑल टाइम लो, मिडटर्म में रिपब्लिकन के लिए बढ़ी चुनौती

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नई दिल्ली। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव का काउंटडाउन शुरू होते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का कारण बन गई है। चुनाव से करीब दो महीने पहले सामने आए ताजा सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, मतदाताओं के बीच डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पर बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। ऐसे संकेत हैं कि नवंबर में होने वाले चुनाव में डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में वापसी कर सकते हैं।

रॉयटर्स और इप्सॉस के ताजा सर्वे के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग ऑल टाइम लो पर है। बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक ईरान युद्ध और देश की आर्थिक स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप की घटती लोकप्रियता का सीधा असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सर्वे में रजिस्टर्ड वोटरों से पूछा गया कि अगर अभी कांग्रेस के चुनाव कराए जाएं तो वे किस पार्टी के उम्मीदवार को वोट देंगे। जवाबों में डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन पर 5 प्रतिशत अंक की बढ़त मिली। खास बात यह है कि डेमोक्रेट समर्थक चुनाव को लेकर रिपब्लिकन समर्थकों की तुलना में ज्यादा उत्साहित नजर आए।

हाउस में बहुमत का बेहद करीबी मुकाबला

मिडटर्म चुनाव में सबसे बड़ा मुकाबला प्रतिनिधि सभा को लेकर माना जा रहा है। फिलहाल हाउस में रिपब्लिकन के पास 218 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं। बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए डेमोक्रेट्स को केवल 3 सीटें और हासिल करनी होंगी। करीब 50 सीटों पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा है, ऐसे में कुछ सीटों के नतीजे ही सदन का पूरा समीकरण बदल सकते हैं।

अगर डेमोक्रेट्स हाउस में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। उनके पास प्रशासन के खिलाफ कई जांच शुरू करने की ताकत होगी। साथ ही, सरकार को अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ समझौते करने पड़ सकते हैं।

सीनेट में भी रिपब्लिकन के सामने चुनौती

सीनेट की तस्वीर फिलहाल हाउस की तुलना में कम स्पष्ट है, लेकिन यहां भी कई सीटों पर मुकाबला कड़ा बताया जा रहा है। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए रिपब्लिकन की 4 सीटें जीतनी होंगी।

अगर डेमोक्रेट्स सीनेट पर भी नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप प्रशासन के लिए कई अहम नियुक्तियों को मंजूरी दिलाना मुश्किल हो सकता है। खासतौर पर राष्ट्रपति के नामित उम्मीदवारों की नियुक्ति रोकने की उनकी क्षमता बढ़ जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में किसी जज का पद खाली होने की स्थिति में सीनेट का यह समीकरण और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

ट्रंप की लोकप्रियता क्यों बन रही चुनावी मुद्दा?

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव को अक्सर मौजूदा राष्ट्रपति के कार्यकाल पर जनता के अप्रत्यक्ष जनमत संग्रह के तौर पर देखा जाता है। राष्ट्रपति की पार्टी को इन चुनावों में अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। इस बार ट्रंप की कम अप्रूवल रेटिंग रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है।

इतिहास भी रिपब्लिकन के लिए ज्यादा राहत देने वाला नहीं है। 1938 के बाद से केवल दो मिडटर्म चुनाव ऐसे रहे हैं, जब राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाई। ऐसे में नवंबर का चुनाव सिर्फ ट्रंप की लोकप्रियता की परीक्षा नहीं, बल्कि संसद में रिपब्लिकन की मौजूदा पकड़ बचाने की भी बड़ी लड़ाई माना जा रहा है।

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