September 6, 2026

ईरान से जंग खत्म हुई तो 40 डॉलर तक गिर सकता है कच्चा तेल, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का दावा

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नई दिल्ली। ईरान के साथ सैन्य संघर्ष खत्म होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का अनुमान है कि युद्ध समाप्त होने पर कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें 40 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे जा सकती हैं। उनके मुताबिक तेल सस्ता होने से अमेरिका में महंगाई का दबाव घटेगा और हाल में बढ़ी सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी बड़ी गिरावट आ सकती है।

बेसेंट ने शुक्रवार को ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान संघर्ष के समाधान के बाद बाजार में तेल की आपूर्ति काफी बढ़ सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संघर्ष के दूसरे चरण में पहुंचने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी।

उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमत 50 डॉलर और यहां तक कि 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, बेसेंट ने यह नहीं बताया कि ईरान के साथ जारी जंग कब समाप्त होगी। उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है।

ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के पार

शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। यह जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर के करीब है। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI करीब 91 डॉलर प्रति बैरल पर था। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों के बाद पिछले कुछ सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।

तेल महंगा होने से अमेरिका में महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ी है। ऊर्जा की लागत बढ़ने का सीधा असर उपभोक्ता कीमतों पर पड़ सकता है। महंगाई की आशंकाओं के चलते अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी ऊपर गई है। इस सप्ताह 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 2023 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

जंग खत्म होते ही महंगाई घटने की उम्मीद

बेसेंट के मुताबिक तेल की कीमतों, महंगाई और ब्याज दरों के बीच संबंध अब साफ नजर आ रहा है। उनका मानना है कि ईरान के साथ संघर्ष खत्म होने पर तेल के दाम तेजी से नीचे आएंगे, जिससे महंगाई का दबाव भी कम हो सकता है।

हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तेल की कीमतों में यह संभावित गिरावट कब शुरू होगी। संघर्ष के तत्काल समाप्त होने के भी कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ऐसे में बाजार की नजर अब अमेरिका-ईरान तनाव और उससे जुड़े ऊर्जा आपूर्ति के हालात पर बनी हुई है।

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