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अमेरिकी सीनेटर रॉन वाइडन की ओर से जारी पत्रों और सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी वायु सेना ने करीब दो महीने पहले अपने कंप्यूटर और मोबाइल फोन में विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करने की प्रक्रिया पूरी की। दूसरी ओर, अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने भी अपने विंडोज उपकरणों में ऐसे पहचानकर्ताओं को हाल में निष्क्रिय किया है।
विज्ञापन पहचानकर्ता ऐसे डिजिटल संकेतक होते हैं जिनका इस्तेमाल आम तौर पर मोबाइल और कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों से संबंधित विज्ञापन और डेटा विश्लेषण के लिए किया जा सकता है। इनसे जुड़े डेटा में स्थान संबंधी जानकारी भी शामिल हो सकती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय यह है कि यदि संवेदनशील स्थानों या सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी गलत हाथों में पहुंचती है तो उसका इस्तेमाल सुरक्षा जोखिम पैदा करने के लिए किया जा सकता है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने इसी खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि व्यावसायिक रूप से उपलब्ध लोकेशन डेटा का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिकों की गतिविधियों को ट्रैक करने और संभावित रूप से उन्हें निशाना बनाने के लिए किया गया। हालांकि, ऐसे डेटा के इस्तेमाल और किसी विशेष हमले के बीच सीधा संबंध हर मामले में स्थापित होना अलग जांच का विषय है।
इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी सांसदों ने सैन्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली डिजिटल तकनीक से जुड़े सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए हैं। सीनेटर रॉन वाइडन और प्रतिनिधि पैट हैरिगन ने सैन्य अधिकारियों से जुड़े सुरक्षा उपायों की समीक्षा के लिए पेंटागन से जांच की मांग की थी। उनका मुख्य concern यह है कि सामान्य व्यावसायिक तकनीक से एकत्र होने वाला डेटा संवेदनशील सैन्य गतिविधियों के बारे में अनजाने में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकता है।
अमेरिकी वायु सेना द्वारा विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करने का फैसला इसी व्यापक सुरक्षा चिंता से जुड़ा माना जा रहा है। सैन्य उपकरणों पर इस तरह की तकनीकी पाबंदी का उद्देश्य उन डिजिटल संकेतों को कम करना है जिनका उपयोग डिवाइस या उपयोगकर्ता से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है।
स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने भी अपने विंडोज उपकरणों के संबंध में इसी दिशा में कदम उठाया है। विशेष अभियान चलाने वाले सैन्य बलों के लिए स्थान और संचार से जुड़ी जानकारी की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ऐसी इकाइयों की गतिविधियां अक्सर संवेदनशील सैन्य अभियानों से जुड़ी होती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने सैन्य क्षेत्र में निजी कंपनियों से मिलने वाले डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन पर बहस को भी तेज किया है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर और विभिन्न डिजिटल सेवाओं से बड़ी मात्रा में डेटा उत्पन्न होता है। यदि इस जानकारी तक अनधिकृत लोगों या संगठनों की पहुंच बनती है तो संवेदनशील गतिविधियों की पहचान करने का जोखिम बढ़ सकता है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों द्वारा विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करना इस खतरे को कम करने की दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम माना जा रहा है। हालांकि, केवल एक सेटिंग बंद करने से डिजिटल सुरक्षा से जुड़े सभी जोखिम समाप्त नहीं होते। सैन्य उपकरणों, नेटवर्क, एप्लीकेशन और डेटा साझाकरण से जुड़े व्यापक सुरक्षा उपाय भी महत्वपूर्ण बने रहते हैं। इस मामले ने यह स्पष्ट किया है कि आधुनिक युद्ध और सैन्य अभियानों में डिजिटल लोकेशन डेटा भी सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है।
