गरीब हितग्राहियों के राशन में हेराफेरी पर प्रशासन सख्त, जांच में सामने आई अनियमितता के बाद सात विक्रेताओं पर होगी कार्रवाई
मामला जिले की छिपरी, बिजरावन, बजीतपुर, बड़ागांव, सुरजपुर, भेलसी और अजनौर स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकानों से जुड़ा है। इन दुकानों को लेकर जिला प्रशासन को शिकायतें मिली थीं। शिकायतों में गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित गेहूं के वितरण में गड़बड़ी और खाद्यान्न की हेराफेरी किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विवेक श्रोतिय के निर्देश पर संबंधित राशन दुकानों की जांच कराई गई। जांच के दौरान दुकानों के दस्तावेजों, खाद्यान्न वितरण से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद खाद्यान्न की मात्रा में बड़ा अंतर सामने आया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, सातों दुकानों से जुड़े मामले में करीब 62 लाख 78 हजार रुपये मूल्य के खाद्यान्न के गबन की बात सामने आई है। इसमें गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित गेहूं, चावल और नमक शामिल हैं। आरोप है कि इन खाद्य सामग्री के वितरण में अनियमितता बरती गई और निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप हितग्राहियों तक राशन नहीं पहुंचाया गया।
सरकारी राशन व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में राशन के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाए जाने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। जांच में सामने आई अनियमितताओं को आधार बनाकर संबंधित दुकान संचालकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सात राशन दुकान विक्रेताओं के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद संबंधित विक्रेताओं की भूमिका की जांच पुलिस स्तर पर भी की जाएगी। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर होगी।
जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाएगा। गरीब हितग्राहियों के लिए निर्धारित राशन में अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पात्र परिवारों के हक का खाद्यान्न किसी भी स्तर पर प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
इस कार्रवाई से राशन दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाए जाने के संकेत भी मिले हैं। सात दुकानों में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद संबंधित रिकॉर्ड और स्टॉक की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब एफआईआर की प्रक्रिया के साथ मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
