शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल
4 सितंबर के कारोबार में सबसे अहम भूमिका कच्चे तेल की कीमतों की रह सकती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में अगर शुक्रवार को तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आता है तो इसका असर बाजार की धारणा पर दिखाई दे सकता है।
दूसरी ओर ग्लोबल बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में हालिया कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली है और गुरुवार को भारतीय बाजार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया था। विदेशी मुद्रा प्रवाह से भारतीय बैंकों की तरलता स्थिति को भी समर्थन मिला है। ऐसे संकेत बाजार में गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।
निवेशकों की नजर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर भी रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में सतर्कता बढ़ी है। यदि अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावना बढ़ाते हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ कमजोर आर्थिक आंकड़े दरों में नरमी की उम्मीद को बढ़ा सकते हैं जिससे उभरते बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।
घरेलू स्तर पर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हाल के कारोबार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि बाजार में उतार चढ़ाव को देखते हुए किसी एक सेक्टर या शेयर में जल्दबाजी से दांव लगाने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर 4 सितंबर का कारोबार बेहद अहम रह सकता है। बाजार में तेजी की कोशिश दिखाई दे सकती है लेकिन महंगा कच्चा तेल वैश्विक तनाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। बाजार की दिशा को लेकर किसी निश्चित तेजी या गिरावट का अनुमान लगाने के बजाय सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। यह खबर निवेश सलाह नहीं है और निवेश का फैसला अपनी रिसर्च तथा विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।
