जन्माष्टमी व्रत में न करें ये गलतियां, पहली बार व्रत रखने वाले जरूर जानें खानपान के नियम
अगर आप फलाहार वाला व्रत रख रहे हैं तो पूरे दिन भूखे रहने की जरूरत नहीं होती। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फल दूध और सूखे मेवों का सेवन किया जा सकता है। केला सेब अनार नाशपाती और दूसरे मौसमी फल व्रत के दौरान लिए जा सकते हैं। इसके अलावा बादाम काजू किशमिश और मखाने भी अच्छे फलाहारी विकल्प माने जाते हैं। दूध दही और लस्सी का सेवन भी किया जा सकता है।
जन्माष्टमी के व्रत में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल भी किया जाता है। इससे पूरी हलवा या दूसरी फलाहारी चीजें बनाई जा सकती हैं। सामक के चावल और इसकी खीर भी व्रत के दौरान खाई जाती है। भोजन में नमक का इस्तेमाल करना हो तो सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। हालांकि व्रत के नियम अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में कुछ हद तक अलग हो सकते हैं।
वहीं कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनसे जन्माष्टमी व्रत के दौरान दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। सामान्य तौर पर दाल चावल गेहूं बेसन और सूजी जैसे अनाज या उनसे बनी चीजें व्रत के फलाहार में शामिल नहीं की जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्याज और लहसुन जैसी तामसिक मानी जाने वाली चीजों से भी परहेज किया जाता है। इसके साथ ही बहुत ज्यादा तला भुना और मसालेदार भोजन करने से बचना बेहतर माना जाता है।
व्रत के दौरान बाजार में मिलने वाले पैक्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से भी सावधानी बरतनी चाहिए। फलाहारी बताकर बेचे जाने वाले हर पैक्ड उत्पाद में व्रत के अनुकूल सामग्री हो यह जरूरी नहीं है। इसलिए घर पर तैयार किया गया हल्का और सात्विक भोजन अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक पूजा का शुभ समय बताया गया है। इसी दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक श्रृंगार और पूजा की जाती है। पूजा के बाद कई गृहस्थ श्रद्धालु चरणामृत माखन मिश्री और धनिया की पंजीरी जैसे प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं। वहीं वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद अगले दिन सुबह व्रत पारण करते हैं। ऐसे में व्रत रखने से पहले अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय जरूर देख लेना चाहिए।
