पुजारी से अलग अफसर संभालते हैं प्रशासन जानिए बड़े मंदिरों में कैसे चलता है CEO सिस्टम
देश के कई बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों में पहले से ही इसी तरह का प्रशासनिक ढांचा मौजूद है। कहीं एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तो कहीं चीफ एडमिनिस्ट्रेटर जैसे पदों पर अधिकारी रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसका उद्देश्य बड़े स्तर पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं से लेकर वित्तीय व्यवस्था सुरक्षा स्वच्छता और मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन तक सभी कामों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना होता है।
आंध्र प्रदेश का तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम इस व्यवस्था का बड़ा उदाहरण है। यहां मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को CEO के बजाय एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कहा जाता है। यही अधिकारी मंदिर प्रशासन के रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी संभालता है। उसके साथ ज्वाइंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वित्त और लेखा से जुड़े अधिकारी मुख्य अभियंता तथा सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी काम करते हैं। इस पूरी व्यवस्था में बोर्ड नीतिगत फैसलों से जुड़ी भूमिका निभाता है जबकि अधिकारी उन फैसलों को जमीन पर लागू कराने का काम करते हैं।
उत्तराखंड के बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के प्रशासन में भी CEO की अहम भूमिका है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अंतर्गत दोनों प्रमुख धामों की व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। समिति में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे पदों के साथ CEO का प्रशासनिक ढांचा भी मौजूद है। CEO के अधीन अलग-अलग अधिकारी मंदिर व्यवस्था से जुड़े कार्यों को देखते हैं। यहां भी धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक कामकाज के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन देखने को मिलता है।
ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में पद का नाम CEO नहीं बल्कि चीफ एडमिनिस्ट्रेटर है। यह अधिकारी मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाता है। उसके जिम्मे मंदिर की संपत्ति श्रद्धालुओं की सुविधाएं साफ-सफाई अनुशासन सुरक्षा और धन तथा आभूषणों की सुरक्षित देखरेख जैसे महत्वपूर्ण काम होते हैं। कानून के तहत चीफ एडमिनिस्ट्रेटर मंदिर प्रबंध समिति के सचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका भी निभाता है।
जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में भी CEO का पद मौजूद है। यहां बोर्ड नीतिगत स्तर पर फैसले करता है जबकि CEO और उनकी टीम श्रद्धालुओं की सुविधाओं यात्रा व्यवस्था सुरक्षा और रोजमर्रा के प्रशासन को संचालित करती है।
दरअसल बड़े मंदिरों में CEO जैसी व्यवस्था का मकसद धार्मिक परंपराओं को बदलना नहीं बल्कि विशाल स्तर पर होने वाले प्रशासनिक काम को पेशेवर तरीके से चलाना है। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही दान और चढ़ावे का प्रबंधन सुरक्षा साफ-सफाई तकनीकी व्यवस्था और मंदिर की संपत्तियों की देखरेख जैसे कामों के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा जरूरी होता है। अयोध्या के राम मंदिर में CEO की नियुक्ति के बाद अब इस व्यवस्था को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
