पद्मावत के जौहर पर छिड़ी बहस स्वरा भास्कर ने दी सफाई कहा मेरा सवाल महिलाओं के जीने के अधिकार को लेकर था
स्वरा ने एक कार्यक्रम के दौरान पद्मावत के क्लाइमैक्स में दिखाए गए जौहर सीन पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि सैकड़ों महिलाओं को आग में कूदते हुए देखने के बाद उनके मन में कई सवाल उठे। उनका कहना था कि समाज को इस बात पर विचार करना चाहिए कि किसी महिला के साथ कोई अमानवीय घटना होने के बाद क्या उसकी जिंदगी का मूल्य खत्म हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी पीड़िता के लिए जीते रहना कमजोरी माना जा सकता है और क्या समाज उसे सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अधिकार देता है। इसी बयान के कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर वायरल हुए और इसके बाद स्वरा के खिलाफ आलोचनाओं की बाढ़ आ गई।
विवाद तब और बढ़ गया जब लोगों ने उनके बयान को जौहर प्रथा और ऐतिहासिक वीरांगनाओं के बलिदान से जोड़ते हुए देखा। सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि जौहर को केवल कायरता या आत्महत्या के नजरिए से देखना इतिहास और उस दौर की परिस्थितियों को नजरअंदाज करना है। कई लोगों ने राजपूत महिलाओं के आत्मसम्मान और बलिदान का हवाला देते हुए स्वरा के बयान की आलोचना की। लगातार बढ़ती ट्रोलिंग के बाद अभिनेत्री ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा।
स्वरा भास्कर ने साफ कहा कि उन्होंने कभी भी रानी पद्मावती या इतिहास की किसी वीरांगना के त्याग को कायरता नहीं कहा है। उनके मुताबिक उनके बयान की अधूरी क्लिप को अलग संदर्भ में फैलाया गया जिससे पूरी बात का अर्थ बदल गया। उन्होंने कहा कि उनका असली सवाल आधुनिक समाज में महिलाओं के प्रति बनी उस सोच को लेकर था जिसमें किसी हिंसक घटना या अपराध की शिकार महिला को कभी कभी अपनी जिंदगी खत्म मानने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। स्वरा ने कहा कि हर पीड़िता को सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार है और किसी भी परिस्थिति में उसकी जिंदगी का मूल्य कम नहीं हो जाता।
अभिनेत्री ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि फिल्मों और कहानियों के माध्यम से ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए जिससे किसी महिला को यह महसूस हो कि किसी हादसे के बाद उसके लिए जीने का कोई कारण नहीं बचा है। उन्होंने दिल्ली के निर्भया मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि गंभीर हिंसा का सामना करने के बावजूद उस युवती ने आखिरी समय तक जीवन के लिए संघर्ष किया और यही जिजीविषा समाज के लिए प्रेरणा होनी चाहिए। स्वरा का कहना है कि किसी भी पीड़िता के सामने जीना शर्म या कमजोरी नहीं बल्कि उसका अधिकार और उसकी ताकत है।
पद्मावत के जौहर सीन को लेकर स्वरा भास्कर की टिप्पणी और उसके बाद दी गई सफाई ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर इतिहास संस्कृति महिला अधिकार और फिल्मों के संदेश को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां एक पक्ष उनके बयान को गलत तरीके से पेश किए जाने की बात कह रहा है वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि ऐतिहासिक घटनाओं पर टिप्पणी करते समय उनके सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ को समझना बेहद जरूरी है। फिलहाल स्वरा की सफाई के बावजूद यह विवाद सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
