ट्रेड डील से पहले निर्यातकों का फीडबैक लेगा भारत, अमेरिका में शुल्क और रूस से तेल खरीद के असर पर बनेगी रणनीति
इस महत्वपूर्ण बैठक में फार्मास्युटिकल्स इंजीनियरिंग वस्त्र कृषि रसायन समुद्री उत्पाद चमड़ा ऑटोमोबाइल ऑटो कंपोनेंट्स हस्तशिल्प और प्लास्टिक जैसे प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा सीआईआई फिक्की एसोचैम और फियो जैसे प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी अपने सुझाव रख सकते हैं। सरकार यह समझना चाहती है कि मौजूदा शुल्क व्यवस्था और अमेरिकी बाजार से जुड़ी व्यापारिक बाधाओं का भारतीय कारोबार और निर्यात पर कितना असर पड़ रहा है। उद्योग जगत से मिलने वाला फीडबैक आगे की बातचीत में भारत की रणनीति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं। वह 30 सितंबर से मिल्वौकी में होने वाली जी20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। ऐसे में उससे पहले भारतीय उद्योगों की स्थिति और उनकी प्राथमिकताओं को समझना सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पीयूष गोयल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा जब भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर या कम से कम तुलनात्मक लाभ हासिल हो। यही वजह है कि सरकार अलग अलग सेक्टर से सीधे जानकारी जुटा रही है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी कह चुके हैं कि दोनों देश फरवरी में तय किए गए ढांचे के आधार पर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
हालांकि व्यापार समझौते के रास्ते में कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। भारतीय निर्यात फिलहाल अमेरिका में सेक्शन 301 जांच के तहत लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क से प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद भी अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। अमेरिकी सीनेट से जुड़े हालिया घटनाक्रम में रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों के निर्यात पर भारी शुल्क लगाने की संभावना ने अनिश्चितता बढ़ाई है। भारत बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीदता है और जुलाई में देश के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही थी।
इन परिस्थितियों के बीच भारत सरकार फिलहाल बातचीत को रचनात्मक बनाए रखने पर जोर दे रही है। उद्योग जगत के साथ होने वाली बैठक से सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि अमेरिकी बाजार में किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा राहत की जरूरत है और प्रस्तावित व्यापार समझौते में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत अमेरिका ट्रेड डील को लेकर होने वाली बातचीत में इन सुझावों का असर साफ दिखाई दे सकता है।
