भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत पर मारुति चेयरमैन का भरोसा! 2031 तक 63 लाख कारों का बाजार होने का अनुमान
भार्गव के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है लेकिन इसके बावजूद भारत का जीएसटी कलेक्शन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। उनका मानना है कि अगर जीएसटी में सुधार नहीं किए गए होते तो पिछले कुछ मुश्किल महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था इतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाती। उन्होंने जीएसटी सुधारों को ऐतिहासिक बदलाव बताते हुए केंद्र सरकार और संबंधित सभी पक्षों के प्रयासों की सराहना की।
मारुति सुजुकी चेयरमैन ने कहा कि आर्थिक सुधारों से देश की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है और इसका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। जब कारोबार का विस्तार होता है तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से सुधारों की प्रक्रिया को और तेज करने की अपील की। साथ ही कारोबार करना आसान बनाने और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनके अनुसार सरकारी कामकाज में तकनीक का अधिक इस्तेमाल होने से भ्रष्टाचार और देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।
आरसी भार्गव ने यह भी कहा कि देश में जितनी तेजी से संपत्ति का निर्माण होगा उतनी ही तेजी से सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। उनका मानना है कि यदि सरकारी कार्यक्रम इसी दिशा में आगे बढ़ते रहे तो आर्थिक विकास का लाभ समाज के ज्यादा बड़े हिस्से तक पहुंच सकता है। इस दौरान उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूद विकास की संभावनाओं को लेकर भी सकारात्मक रुख जाहिर किया।
ऑटोमोबाइल सेक्टर की बात करें तो मारुति सुजुकी ने आने वाले वर्षों में कार बाजार के मजबूत विस्तार का अनुमान जताया है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2031 तक भारत में कार इंडस्ट्री का आकार 61 लाख से 63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। खासतौर पर छोटी कारों के बाजार में आने वाले वर्षों में तेज वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। कंपनी इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार कर रही है।
मारुति सुजुकी की इंस्टॉल्ड प्रोडक्शन क्षमता वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक 29 लाख यूनिट तक पहुंचाने की योजना है। इसके बाद वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक इसे बढ़ाकर 36.5 लाख यूनिट करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी ने अगले पांच वर्षों के लिए अपना पूंजीगत खर्च भी बढ़ाकर 77500 करोड़ रुपए कर दिया है। भार्गव ने संकेत दिया कि कंपनी का यह बड़ा निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता और आने वाले समय में ऑटोमोबाइल बाजार में बढ़ती मांग पर भरोसे को दर्शाता है।
