August 31, 2026

3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक

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भोपाल । मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से काम कर रहे अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारियों ने अब अपनी मांगों को लेकर सरकार और भाजपा संगठन के सामने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। स्कूलों छात्रावासों पंचायतों अस्पतालों और नगरीय निकायों समेत अलग अलग विभागों में सेवाएं दे रहे सैकड़ों कर्मचारी 7 सितंबर को भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे। कर्मचारी संगठन का कहना है कि वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को वर्ष 2003 में किए गए उस वादे की याद दिलाएंगे जिसमें अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर शासकीय सेवक का दर्जा देने की बात कही गई थी। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरना अनशन में बदला जा सकता है।

अस्थायी आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा की ओर से भाजपा संगठन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 का विधानसभा चुनाव अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर लड़ा गया था। संगठन के मुताबिक उस समय तत्कालीन भाजपा नेता उमा भारती ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में वल्लभ भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। प्रदेशभर में यात्राएं कर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा भी किया गया था। कर्मचारियों का कहना है कि उस समय से अब तक करीब 23 साल बीत चुके हैं लेकिन उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

कर्मचारी नेताओं के मुताबिक सरकारी विभागों के नियमित कर्मचारियों की तरह ही अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारी भी लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। स्कूलों और छात्रावासों में सफाई खाना बनाने और भृत्य के काम से लेकर पंचायतों में चौकीदारी नल जल व्यवस्था अस्पतालों में विभिन्न सेवाओं नगरीय निकायों में सफाई और टैक्स वसूली जैसे काम भी इन कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय या वेतन मिलने का आरोप संगठन ने लगाया है।

मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि 2003 में अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 3 हजार रुपए मिलते थे जबकि आज भी कई कर्मचारियों को महज 4 से 5 हजार रुपए ही मिल रहे हैं। इसी तरह पंचायतों के चौकीदार और नल जल कर्मचारी उस समय करीब 2 हजार रुपए पाते थे और वर्तमान में भी कई कर्मचारियों का भुगतान 2 से 3 हजार रुपए के आसपास होने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि 23 साल में महंगाई कई गुना बढ़ गई लेकिन हजारों कर्मचारियों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।

कर्मचारी नेताओं ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से अस्थायी कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने की घोषणा का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि यह घोषणा भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी। अब संगठन सरकार द्वारा निर्धारित 12,425 रुपए न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग कर रहा है।

कर्मचारी संगठन ने आंदोलन को दो चरणों में रखने की जानकारी दी है। स्कूलों छात्रावासों और विभिन्न विभागों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारी 7 सितंबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचकर अपनी मांग रखेंगे जबकि ग्राम पंचायतों के चौकीदार नल जल चालक और अन्य कर्मचारी 8 सितंबर को संगठन के सामने अपनी बात रखेंगे। कर्मचारियों ने सरकार के 1.62 लाख रुपए प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि जब बड़ी संख्या में कर्मचारी बेहद कम मासिक आय में काम कर रहे हैं तो उनके जीवन यापन और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

अब कर्मचारियों की नजर 7 और 8 सितंबर को होने वाले प्रदर्शन पर है। संगठन का कहना है कि वह सरकार से केवल आश्वासन नहीं बल्कि न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण को लेकर स्पष्ट निर्णय चाहता है। मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

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