JIM Corbbet: नहीं रहा पर्यटकों का चहेता ‘भोला टाइगर’, ढेला रेस्क्यू सेंटर में तोड़ा दम
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कॉर्बेट में शांत स्वभाव के लिए था मशहूर
Ramnagar Fanto Range Tiger Death : रामनगर के तराई पश्चिमी वन प्रभाग की फांटो रेंज से करीब दो महीने पहले गंभीर रूप से घायल अवस्था में रेस्क्यू कर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर लाए गए वयस्क नर बाघ ने आखिरकार देर शाम अंतिम सांस ली। यह वही बाघ था, जिसे फांटो पर्यटन जोन में नेचर गाइड, जिप्सी चालक और स्थानीय लोग प्यार से भोला टाइगर के नाम से जानते थे। भोला की मौत की खबर सामने आते ही वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में मायूसी छा गई।
‘भोला टाइगर’: हार गया जिंदगी की जंग
इस वयस्क नर बाघ की उम्र लगभग 5 से 6 वर्ष आंकी गई है। यह 26 जून 2026 को गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसके बाद फांटो रेंज से रेस्क्यू कर ढेला रेस्क्यू सेंटर लाया गया था। रेस्क्यू के समय उसकी शारीरिक स्थिति बेहद खराब थी. इसके बाद पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका लगातार इलाज किया जा रहा था। वन विभाग की ओर से उसकी हालत को देखते हुए हरसंभव चिकित्सा और देखभाल उपलब्ध कराई गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद शाम करीब 4:30 बजे इलाज के दौरान भोला टाइगर ने दम तोड़ दिया।
शांत स्वभाव : मशहूर था
भोला टाइगर फांटो पर्यटन जोन में बहुत चर्चित था। नेचर गाइड और जिप्सी चालकों की मानें तो उसका स्वभाव बेहद शांत और भोला था। वह अक्सर पर्यटकों को लेकर जंगल में पहुंचने वाली जिप्सियों के आसपास शांत होकर बैठ जाता था और जिप्सियों की मौजूदगी के बावजूद आक्रामक व्यवहार नहीं करता था। इसी शांत और भोले स्वभाव के चलते नेचर गाइड और जिप्सी चालकों ने उसका नाम भोला रख दिया था। देखते ही देखते वह फांटो पर्यटन जोन में ‘भोला टाइगर’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया था।
पोस्टमार्टम: बाघ के शव का हुआ
भोला की मौत के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत 26 अगस्त को ढेला रेस्क्यू सेंटर में पशु चिकित्साधिकारियों के गठित पैनल ने उसके शव का पोस्टमार्टम किया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार की गई। पोस्टमार्टम के दौरान वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, संबंधित विशेषज्ञ संस्थाओं और एनजीओ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। पोस्टमार्टम के दौरान बाघ के आवश्यक जैविक नमूने एकत्र किए गए हैं। इन नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून भेजा जा रहा है।
जल्द सामने आएंगे : बाघ की मौत के कारण
जांच रिपोर्ट के आधार पर बाघ की मौत के कारणों से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिलेगी. पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद NTCA की गाइडलाइन के अनुसार, बाघ के शव का विधिवत दहन कर निस्तारण कर दिया गया। इस दौरान कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उप निदेशक राहुल मिश्रा, वन विभाग के अधिकारी, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी, WWF, NTCA और द कॉर्बेट फाउंडेशन के प्रतिनिधियों सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
जंगल की यादों का हिस्सा : ‘भोला टाइगर’
वन विभाग के अनुसार उपचार के दौरान बाघ की गंभीर स्थिति को देखते हुए लगातार आवश्यक चिकित्सा और स्वास्थ्य निगरानी की गई। पूरी प्रक्रिया में निर्धारित वन्यजीव प्रबंधन प्रोटोकॉल और पारदर्शिता का पालन किया गया। ताकि भोला टाइगर की मौत के कारणों की वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित हो सके। फांटो पर्यटन जोन में अपनी शांत फितरत और जिप्सियों के आसपास बेखौफ मौजूदगी के लिए पहचाने जाने वाला भोला टाइगर अब जंगल की यादों का हिस्सा बन गया है।. नेचर गाइड और जिप्सी चालकों के बीच उसकी पहचान लंबे समय तक याद की जाएगी।
