रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग
भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल को रक्षासूत्र बांधकर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि सनातन परंपरा के प्रमुख पर्वों का शुभारंभ राजाधिराज महाकाल के आंगन से होता है।
राखी बांधने के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित किए जाने के बाद 2 फीट लंबी विशेष राखी भगवान के स्वरूप पर समर्पित की गई। पूरे सावन व्रत रखने वाली महिलाओं ने महाकाल का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोला और बाद में भाइयों की कलाई पर राखी बांधी।
सवा लाख लड्डुओं का लगाया भोग
रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर बाबा महाकाल को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरे सावन उपवास रखने वाले श्रद्धालु पूर्णिमा पर महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रत पूर्ण करते हैं। भक्तों में प्रसाद वितरण के लिए मंदिर समिति और पुजारियों की ओर से बड़े पैमाने पर लड्डू तैयार कराए गए।
एक सप्ताह में तैयार हुई विशेष राखी
पुजारी आकाश गुरु के मुताबिक, करीब 2 फीट लंबी यह विशेष राखी पुजारी परिवार की महिलाओं ने लगभग एक सप्ताह की मेहनत से तैयार की। राखी बनाते समय महिलाएं लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं।
राखी को रेशमी वस्त्र, रेशमी धागों, कांच वर्क और आभूषणों से सजाया गया। इसमें भगवान महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ‘ॐ’, त्रिपुंड और रुद्राक्ष को शामिल किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता के प्रतीक चिन्ह भी राखी में लगाए गए।
