गांवों और महिलाओं की बैंकिंग में बड़ी छलांग जन-धन योजना के खाते 59 करोड़ पार औसत जमा में भी जबरदस्त बढ़ोतरी
पीएम जन-धन योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को हुई थी और अब इसे 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था जिनके पास पहले कोई बैंक खाता नहीं था। खास बात यह है कि योजना के तहत खुले खातों में 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इससे पता चलता है कि बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार देश के छोटे शहरों और गांवों तक भी तेजी से हुआ है। वहीं कुल खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत है जो वित्तीय समावेशन के साथ महिला आर्थिक भागीदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
19 अगस्त 2026 तक जन-धन खातों में प्रति खाता औसत जमा राशि 5,356 रुपए दर्ज की गई। मंत्रालय के अनुसार पिछले 12 वर्षों में प्रति खाते औसत जमा राशि करीब 3.4 गुना बढ़ी है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि खाताधारक इन बैंक खातों का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके भीतर नियमित बचत की आदत भी विकसित हो रही है। यानी जन-धन खाते अब केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का माध्यम नहीं बल्कि परिवारों की रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
योजना की एक बड़ी खासियत इसमें मिलने वाली बैंकिंग और वित्तीय सुरक्षा सुविधाएं भी हैं। प्रत्येक पात्र खाते के साथ मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड उपलब्ध कराया जाता है जिसमें 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर शामिल है। इसके अलावा पात्र खाताधारकों को 10 हजार रुपए तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिल सकती है। यह सुविधा अचानक सामने आने वाली आर्थिक जरूरतों के समय परिवारों के लिए मददगार साबित हो सकती है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमजेडीवाई का उद्देश्य प्रत्येक ऐसे वयस्क व्यक्ति को बेसिक बैंक अकाउंट उपलब्ध कराना है जिसका पहले बैंक खाता नहीं था। इस खाते के लिए न्यूनतम बैलेंस रखने की बाध्यता नहीं है और मेंटेनेंस चार्ज भी नहीं लिया जाता। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जन-धन खातों के विस्तार का असर बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच पर भी पड़ा है। बैंक खाता होने से आम लोगों के लिए बीमा और पेंशन योजनाओं से जुड़ना आसान हुआ है। सरकार का कहना है कि देशभर में लगातार चलाए गए अभियानों के जरिए बैंकिंग पहुंच को लगभग हर वर्ग तक ले जाने और जरूरतमंद लोगों के बीच बीमा तथा पेंशन कवरेज का दायरा बढ़ाने की कोशिश जारी है। 59 करोड़ से ज्यादा खातों और 3.17 लाख करोड़ रुपए की जमा राशि का आंकड़ा इस अभियान की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
