भारत-पनामा कारोबार में आएगी नई रफ्तार! 600 मिलियन डॉलर के व्यापार को 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
राजदूत के मुताबिक पनामा नहर के कारण देश को वैश्विक समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त हासिल है। इसके अलावा मजबूत समुद्री और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम स्पेशल इकोनॉमिक जोन और कोलोन फ्री ट्रेड जोन जैसी सुविधाएं भारतीय कंपनियों के लिए वेयरहाउसिंग डिस्ट्रीब्यूशन मैन्युफैक्चरिंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकती हैं। उनका कहना था कि भारतीय कंपनियां पनामा में अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी स्थापित करके आसपास के कई बाजारों को एक साथ कवर कर सकती हैं।
खास तौर पर फार्मास्यूटिकल्स केमिकल्स ऑटोमोबाइल मोटरसाइकिल इंजीनियरिंग कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अवसरों की बड़ी संभावना बताई गई है। कंपनियां पनामा को रीजनल हेडक्वार्टर या डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के तौर पर विकसित कर सकती हैं। इससे अलग अलग देशों में कारोबार शुरू करने के दौरान आने वाली लॉजिस्टिक्स स्थानीय नियमों डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और बाजार की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
मुंबई में हुई इस बातचीत में भारत और पनामा के बीच मौजूदा व्यापार को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन और ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष डॉ. विजय कलंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच फिलहाल वस्तुओं का व्यापार करीब 600 मिलियन डॉलर का है। उन्होंने कहा कि मजबूत बी2बी संपर्क बाजार की बेहतर जानकारी और संभावनाओं वाले क्षेत्रों में केंद्रित सहयोग के जरिए अगले दो वर्षों में इस व्यापार को दोगुना कर 1.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पनामा की रणनीतिक लोकेशन और अमेरिका के साथ उसकी कनेक्टिविटी भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय विस्तार के लिए प्रभावी मंच दे सकती है। वहीं मुंबई में पनामा के कॉन्सल जनरल रॉबर्टो रोड्रिग्ज प्राडा ने भी दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सीधे संपर्क बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेष संभावनाएं गिनाईं। उनके मुताबिक पनामा के स्पेशल इकोनॉमिक रिजीम के तहत वेयरहाउसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन से लेकर असेंबली टेस्टिंग फिनिशिंग और मैन्युफैक्चरिंग तक भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। ऐसे में भारत और पनामा के बीच कारोबारी रिश्ते आने वाले समय में एक नए क्षेत्रीय विस्तार की नींव रख सकते हैं।
