विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा
कोलंबो टेस्ट में भी भारतीय स्पिन गेंदबाजों की ओर से नो-बॉल की समस्या देखने को मिली। मुकाबले में भारतीय स्पिनर्स अब तक कुल 10 नो-बॉल फेंक चुके थे। टेस्ट क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजों द्वारा नो-बॉल करना वैसे भी टीम के लिए महंगा साबित हो सकता है क्योंकि इससे बल्लेबाज को अतिरिक्त मौका मिलने के साथ विपक्षी टीम को अतिरिक्त रन भी मिलते हैं। जडेजा जैसे अनुभवी गेंदबाज से ऐसी गलती बार-बार होना टीम के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
साल 2021 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो रवींद्र जडेजा 88 नो-बॉल के साथ इस अनचाही सूची में सबसे ऊपर हैं। पाकिस्तान के स्पिनर नोमान अली 40 नो-बॉल के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यानी जडेजा और दूसरे नंबर के गेंदबाज के बीच भी बड़ा अंतर है। श्रीलंका के लसिथ एम्बुलडेनिया 33 नो-बॉल के साथ तीसरे नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जैक लीच ने इस दौरान 19 नो-बॉल फेंकी हैं। वहीं वेस्टइंडीज के जोमेल वारिकन और अफगानिस्तान के जहीर खान के नाम 17-17 नो-बॉल दर्ज हैं।
जडेजा के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह भारतीय टेस्ट टीम के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद ऑलराउंडर्स में शामिल हैं। गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी और फील्डिंग में भी उनकी भूमिका बेहद अहम रहती है। ऐसे में नो-बॉल की बार बार होने वाली गलती विपक्षी टीम के खिलाफ भारत की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में जब एक विकेट के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है तब नो-बॉल पर मिला अतिरिक्त मौका मैच का रुख बदल सकता है।
अगर कोलंबो टेस्ट की बात करें तो भारत ने पहली पारी में 503 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर समाप्त हो गई और भारत को 213 रन की बड़ी बढ़त मिली। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका को फॉलोऑन देने का फैसला किया। दूसरी पारी में श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए।
हालांकि इसके बाद पासिंदु सूर्यबंदारा और धनंजय डी सिल्वा ने पारी को संभाल लिया। चौथे दिन बारिश के कारण खेल जल्दी समाप्त होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में 6 विकेट पर 229 रन बना लिए थे और टीम ने भारत के खिलाफ 16 रन की बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों के लिए आखिरी विकेट हासिल करना बेहद जरूरी हो गया था। इस दौरान जडेजा की नो-बॉल भी चर्चा का बड़ा कारण बनी।
जडेजा भले ही इस रिकॉर्ड को कभी याद नहीं रखना चाहेंगे लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में नो-बॉल उनकी गेंदबाजी की एक बड़ी कमजोरी बन गई है। अब भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि आगे के मुकाबलों में वह इस गलती पर नियंत्रण पाएंगे और अपनी शानदार गेंदबाजी से टीम को ज्यादा से ज्यादा सफलता दिलाएंगे।
