August 26, 2026

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू: संक्रमित पांच मरीजों की मौत, अलर्ट जारी

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Swine Flu
  • अब तक 49 लोगों में पुष्टि

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू (इंफ्लुएंजा एच1एन1) के मामले स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रहे हैं। संक्रमण से जूझ रहे पांच लोगों की मौत दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, ये मरीज दूसरी बीमारियों से भी जूझ रहे थे। उधर, प्रदेश में मरीजों की संख्या 31 से बढ़कर 49 हो गई है। अब तक सामने आए मरीजों में 34 देहरादून के हैं।

एक अगस्त से अब तक प्रदेश में 49 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के राज्य सर्विलांस अधिकारी डॉ. पंकज के मुताबिक, जहां से भी मरीज सामने आए हैं, उन इलाकों में स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है। रैपिड रिस्पॉन्स टीमें सभी जिलों में माइक्रो लेवल पर काम कर रही हैं। रिस्पॉन्स टीम में शामिल फिजिशियन और एक विशेषज्ञ समेत चार स्वास्थ्यकर्मी संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्क्रीनिंग कर रहे हैं।

खंगाली जा रही मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, संक्रमण की चपेट में आने वाले व्यक्ति की पिछले 10 से 15 दिनों की ट्रैवल हिस्ट्री भी खंगाली जा रही है। इसके अलावा कौन-कौन लोग मरीज के संपर्क में आए हैं, इसका भी पता लगाया जा रहा है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोगों की भी इंफ्लुएंजा एच1एन1 की जांच की जा रही है।

निर्देश: विशेष ध्यान को-मॉर्बिड वाले मरीजों पर देने के लिए
प्रदेश में अब तक सामने आए मरीजों में ज्यादातर देहरादून के हैं। ऐसे में दून के सीएमओ डॉ. मनोज कुमार को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. शर्मा के अनुसार, को-मॉर्बिड यानी ऐसे मरीज, जो पहले से शुगर, रक्तचाप, श्वसन और दिल की बीमारियों से जूझ रहे हैं, उन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कम होती है। ऐसे में एच1एन1 संक्रमण की चपेट में आना उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। एच1एन1 से संक्रमित जिन पांच मरीजों की मौत हुई है, वे भी को-मॉर्बिड स्थिति में थे।

संक्रमित व्यक्ति को आइसोलेट करना जरूरी
एम्स ऋषिकेश के इंटरनल मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार बताते हैं कि संक्रमण की चपेट में आने वाले व्यक्ति और उसके संपर्क में आने वाले लोगों को आइसोलेट करना जरूरी है। इससे संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सकेगा। स्वाइन फ्लू के लक्षणों को गंभीरता से लेना होगा। सांस लेने में दिक्कत, अचानक बुखार, ठंड लगना, खांसी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण सामने आने पर बिना किसी देरी के चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय का कहना है कि इंफ्लुएंजा एच1एन1 वायरस से निपटने के लिए अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की गई है। विभाग प्रत्येक स्तर पर इससे निपटने के लिए तैयार है।

स्वाइन फ्लू क्या है?
स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है। यह इंफ्लुएंजा ए वायरस के एच1एन1 सबटाइप से फैलता है। इसे स्वाइन फ्लू कहने के पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि 2009 में फैली महामारी के दौरान सामने आए ए (एच1एन1) पीडीएम09 वायरस को स्वाइन फ्लू कहा गया था। इसे मौसमी इंफ्लुएंजा भी कहा जाता है।

लक्षण सामने आने पर ये करें
1. हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
2. मास्क पहनें।
3. छींकते और खांसते समय मुंह और नाक को ढकें।
4. आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।

 

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