नौकरी छोड़ने की बढ़ती तैयारी के बीच कार्यस्थलों में जेन जी का प्रभाव बढ़ा, एआई को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक कार्यबल की संरचना में भी बड़ा बदलाव आया है। जेन जी यानी नई पीढ़ी के कर्मचारियों की हिस्सेदारी 2023 में 17 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 34 प्रतिशत हो गई है। यानी केवल तीन वर्षों में इस पीढ़ी की कार्यबल में हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है। इसके साथ ही कंपनियों को नई पीढ़ी की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यस्थल नीतियों में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है।
जेन जी कर्मचारियों में वेतन, पहचान और पदोन्नति के मानदंडों को लेकर अस्पष्टता स्वीकार करने की क्षमता अपेक्षाकृत कम बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार जब उन्हें अपनी अपेक्षाओं और वास्तविक कार्यस्थल अनुभव के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है तो वे नौकरी बदलने का फैसला तेजी से ले सकते हैं।
कर्मचारियों को बनाए रखने की समस्या केवल युवा कार्यबल तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत है। इससे प्रबंधन स्तर पर बढ़ते दबाव और असंतोष की स्थिति का संकेत मिलता है।
फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे एक ओर प्रोजेक्ट पूरा करने और ग्राहकों की अपेक्षाओं का दबाव संभालते हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी टीम की जरूरतों और समस्याओं पर भी ध्यान देते हैं। संगठन में होने वाले बदलावों को कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी अक्सर इन्हीं स्तरों पर आती है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों की अपनी औपचारिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अतिरिक्त प्रयास करने की इच्छा में कमी आई है। हालांकि कार्यस्थल की बुनियादी परिस्थितियों में सुधार हुआ है, लेकिन केवल सुविधाओं में बदलाव कर्मचारियों के लंबे समय तक जुड़े रहने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। कर्मचारी संगठन की संस्कृति, विकास के अवसर और काम की स्पष्टता जैसे व्यापक पहलुओं को भी महत्व दे रहे हैं।
प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। करीब 10 में से छह संगठन अपने रोजमर्रा के कामकाज में एआई का उपयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद केवल 10 में से दो कर्मचारियों ने पूरी तरह सहमति जताई कि उन्हें एआई उपकरणों से जुड़े संभावित फायदे और जोखिमों की पर्याप्त जानकारी दी गई है।
इस स्थिति में कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ नई पीढ़ी के कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं को समझना होगा और दूसरी तरफ अनुभवी कर्मचारियों तथा प्रबंधकीय स्तर पर बढ़ते नौकरी बदलाव के रुझान को रोकना होगा। स्पष्ट वेतन और पदोन्नति व्यवस्था, बेहतर संवाद, विकास के अवसर और एआई के सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
