SIP Rule-40 से 40 साल तक 2 करोड़ का लक्ष्य, 21 साल की उम्र में कितनी मासिक SIP से शुरू करें निवेश
SIP यानी Systematic Investment Plan के जरिए म्यूचुअल फंड में एक तय राशि नियमित अंतराल पर निवेश की जाती है। Rule-40 की अवधारणा में शुरुआत में एक निश्चित मासिक रकम से निवेश शुरू किया जाता है और इसके बाद हर साल SIP की राशि 10 फीसदी बढ़ाई जाती है। इसका उद्देश्य बढ़ती आय के साथ निवेश की क्षमता बढ़ाना और लंबे समय में कंपाउंडिंग का लाभ लेना है।
इस रणनीति में निवेश शुरू करने की उम्र बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। उदाहरण के तौर पर 40 साल की उम्र तक 2 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने के लिए 21 साल की उम्र में शुरुआत करने पर करीब 11,796 रुपये की मासिक SIP की जरूरत बताई गई है। अगर शुरुआत 22 साल की उम्र में होती है तो यह राशि करीब 13,875 रुपये प्रति माह हो जाती है।
इसी तरह 23 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर करीब 16,370 रुपये, 24 साल की उम्र में करीब 19,379 रुपये और 25 साल की उम्र में लगभग 23,031 रुपये की शुरुआती मासिक SIP की जरूरत पड़ सकती है। इससे स्पष्ट होता है कि निवेश शुरू करने में देरी होने पर शुरुआती निवेश राशि बढ़ती जाती है।
21 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाले व्यक्ति के मामले में इस गणना के अनुसार करीब 19 वर्षों तक निवेश जारी रखना होगा। 10 फीसदी सालाना स्टेप-अप के साथ कुल निवेश लगभग 72.42 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। 12 फीसदी औसत अनुमानित रिटर्न के आधार पर यह राशि बढ़कर करीब 2 करोड़ रुपये के लक्ष्य तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस गणना में लगभग 1.28 करोड़ रुपये का हिस्सा अनुमानित रिटर्न से जुड़ा हो सकता है।
इस रणनीति का फायदा खासतौर पर उन युवाओं को हो सकता है जो अपने करियर की शुरुआत में हैं और भविष्य में आय बढ़ने की संभावना रखते हैं। शुरुआत में आय सीमित होने के कारण बड़ी रकम निवेश करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन छोटी SIP से शुरुआत करके हर वर्ष राशि बढ़ाने से निवेश का आकार धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि, 2 करोड़ रुपये का लक्ष्य निश्चित या गारंटीड रकम नहीं है। 12 फीसदी सालाना रिटर्न केवल अनुमान के तौर पर लिया गया है और बाजार आधारित निवेश में वास्तविक रिटर्न समय के साथ बदल सकता है। इसलिए निवेशक को अपनी आय, खर्च, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।
SIP Rule-40 का मूल विचार जल्द शुरुआत, नियमित निवेश और बढ़ती आय के साथ निवेश बढ़ाने पर आधारित है। लंबे समय तक निवेश बनाए रखने और बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद अनुशासन कायम रखने से कंपाउंडिंग को अधिक समय मिल सकता है। यही कारण है कि निवेश की शुरुआत की उम्र इस तरह की लंबी अवधि की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
