August 22, 2026

कोलंबो में नहीं चलेगी श्रीलंका की स्पिन वाली चाल? टीम इंडिया को फंसाने का दांव पड़ सकता है उल्टा, पिच पर बड़ा अपडेट

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नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब यानी एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम गॉल में पहला टेस्ट 165 रन से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी है। अब भारत के पास कोलंबो में जीत हासिल कर सीरीज अपने नाम करने का मौका है। दूसरी तरफ श्रीलंका के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है क्योंकि सीरीज बराबर करने के लिए उसे हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।

मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा कोलंबो की पिच को लेकर हो रही है। माना जा रहा था कि श्रीलंका भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को परेशान करने के लिए बेहद ज्यादा स्पिन वाली पिच तैयार कर सकता है। हालांकि ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मेजबान टीम इस रणनीति से पीछे हटती दिखाई दे रही है। श्रीलंका क्रिकेट से जुड़े एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि फिलहाल गॉल टेस्ट जैसी संतुलित पिच तैयार करने के बारे में सोचा जा रहा है। ऐसी पिच पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को पर्याप्त मदद मिलने की उम्मीद रहती है।

श्रीलंका के लिए सबसे बड़ी चिंता उसका कमजोर बल्लेबाजी क्रम है। अनुभवी बल्लेबाज कुसल मेंडिस और दिनेश चांदीमल दूसरे टेस्ट से बाहर हैं जबकि पथुम निसांका भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अगर पिच को जरूरत से ज्यादा स्पिन के अनुकूल बनाया जाता है तो इसका नुकसान श्रीलंकाई बल्लेबाजों को भी उठाना पड़ सकता है। टीम पहले ही भारत के स्पिन आक्रमण के सामने दबाव में रही है और युवा बल्लेबाजों को कठिन परिस्थितियों में उतारना जोखिम भरा फैसला साबित हो सकता है।

गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया था। देवदत्त पडिक्कल ने पहली पारी में 167 रन की बड़ी पारी खेली जबकि भारत ने 460 रन से ज्यादा का स्कोर खड़ा किया। श्रीलंका के स्पिनरों ने मुकाबले में वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन भारतीय बल्लेबाजी की गहराई ने मेजबान टीम को दबाव में बनाए रखा। भारत ने अंत में 165 रन से मुकाबला अपने नाम किया।

कोलंबो में संतुलित पिच होने की स्थिति में टॉस और पहली पारी का स्कोर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। एसएससी मैदान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताता है कि यहां पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को बड़े स्कोर के जरिए दबाव बनाने का मौका मिल सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस मैदान पर टेस्ट में पहली पारी का औसत स्कोर 323 रन रहा है जबकि दूसरी पारी का औसत 354 रन है।

श्रीलंका के लिए एक और चुनौती टीम संयोजन की है। पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर रसेल अर्नोल्ड ने भी माना है कि मेजबान टीम भारत की तरह तीन विशेषज्ञ स्पिनरों के साथ उतरने की स्थिति में नहीं है क्योंकि इससे बल्लेबाजी का संतुलन बिगड़ सकता है। भारत के पास रविंद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी मजबूत योगदान दे सकते हैं। इसी कारण श्रीलंका को पिच और प्लेइंग इलेवन दोनों में संतुलन साधना होगा।

ऐसे में कोलंबो टेस्ट में असली मुकाबला सिर्फ भारतीय बल्लेबाजों और श्रीलंकाई स्पिनरों के बीच नहीं होगा बल्कि रणनीति और टीम संतुलन के बीच भी होगा। अगर श्रीलंका बहुत ज्यादा टर्न वाली पिच तैयार करता है तो उसके अनुभवहीन बल्लेबाज खुद मुश्किल में पड़ सकते हैं। वहीं संतुलित विकेट मिलने पर भारत की मजबूत बल्लेबाजी को रोकना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी। इसलिए पिच का अंतिम मिजाज दोनों टीमों की रणनीति और मैच के नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है।

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