कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील
यह मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि हत्या के मामले में नामजद आरोपी रमेश लोधी पर दबाव बनाकर उसकी कंहवारा स्थित जमीन को कथित तौर पर वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कराया गया। इसी प्रकरण में सीएसपी नेहा पच्चीसिया की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, संबंधित जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.86 लाख रुपये बताया गया है, जबकि उसे कथित रूप से 18.20 लाख रुपये में मारूफ अहमद हनफी के नाम हस्तांतरित कराया गया। मामले में मारूफ अहमद हनफी को कथित फ्रंटमैन के तौर पर बताया गया है। जमीन के लेनदेन को लेकर पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी जांच की जा रही है।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कटनी में सीएसपी कार्यालय को भी सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद प्रशासनिक टीम ने की। कार्यालय सील करने का उद्देश्य मामले से संबंधित केस डायरी, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखना बताया गया है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्यों पर प्रभाव की आशंका न रहे।
मामले में कुठला थाने में एफआईआर संख्या 0738/2026 दर्ज की गई है। सीएसपी नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। दर्ज धाराओं में 61, 198, 199(बी), 308(7) और 318(4) शामिल हैं।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि जमीन के कथित सौदे में सीएसपी से करीबी बताए जा रहे क्षितिज राज बारापत्रे के खातों से धनराशि की फंडिंग की गई थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे लेनदेन की प्रकृति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के कथित दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
निलंबन की कार्रवाई के साथ गृह विभाग की ओर से विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच को भी तेज किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच के दौरान जमीन सौदे, कथित वित्तीय लेनदेन, पुलिस पद के संभावित दुरुपयोग और संबंधित दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
सरकार की इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
