पीएम-आशा से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य, डिजिटल खरीद व्यवस्था ने बढ़ाई पारदर्शिता और भुगतान प्रक्रिया की रफ्तार
पीएम-आशा के अंतर्गत दलहन, तिलहन और खोपरा जैसी प्रमुख कृषि उपज की समय पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है। किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी उपज बेचने में सुविधा मिले, इसके लिए अतिरिक्त खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। इससे बाजार तक पहुंच बढ़ाने और बिक्री प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिली है।
योजना की खरीद व्यवस्था में नाफेड और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों से निर्धारित व्यवस्था के तहत उपज खरीदी जाती है। इसका उद्देश्य बाजार में कीमतों के दबाव के समय किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ उपलब्ध कराना और उन्हें तत्काल कम कीमत पर उपज बेचने से बचाना है।
सरकार ने पीएम-आशा की खरीद प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है। आधार आधारित प्रमाणीकरण के साथ ई-एनएएम, ई-समृद्धि और ई-सम्युक्ति जैसे डिजिटल मंचों का उपयोग खरीद और भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किया जा रहा है। डिजिटल प्रणाली से किसानों की पहचान, खरीद संबंधी रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में सहायता मिल रही है।
कृषि क्षेत्र में भंडारण और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष का समर्थन भी योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने में उपयोगी माना गया है। खरीद केंद्रों और कृषि ढांचे के विस्तार से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
पीएम-आशा के लिए बजटीय प्रावधान में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में योजना के तहत वास्तविक व्यय 5,437.99 करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2025-26 में इसका बजट बढ़ाकर 6,941.36 करोड़ रुपये किया गया, जबकि 2026-27 के लिए 7,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बढ़ता आवंटन किसानों की आय सुरक्षा और कृषि मूल्य समर्थन व्यवस्था को मजबूत करने की प्राथमिकता को दर्शाता है।
फसल उत्पादन लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच अंतर भी किसानों के लिए मूल्य सुरक्षा के महत्व को स्पष्ट करता है। वर्ष 2026-27 में सामान्य धान की उत्पादन लागत 1,627 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है, जबकि एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल है। इस तरह दोनों के बीच 814 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है।
पीली सोयाबीन के मामले में उत्पादन लागत 3,805 रुपये प्रति क्विंटल और एमएसपी 5,708 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके अलावा गेहूं की उत्पादन लागत 1,239 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।
जूट के लिए उत्पादन लागत 3,662 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है, जबकि एमएसपी 5,925 रुपये प्रति क्विंटल है। इस आधार पर दोनों के बीच 2,293 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर बनता है। सरकार की कोशिश है कि खरीद व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और बाजार हस्तक्षेप के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले तथा कृषि बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता को और मजबूत किया जा सके।
