सरस्वती विहार हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार ने सफदरजंग अस्पताल में ली अंतिम सांस, लंबे समय से जेल में थे बंद
जानकारी के अनुसार, जेल में सज्जन कुमार के शरीर में कोई हलचल नहीं मिलने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की और उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके बेटे जग प्रवेश कुमार भी निधन की जानकारी मिलने के बाद सफदरजंग अस्पताल पहुंचे।
सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े कई मामलों में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई का सामना करते रहे। दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में 1 नवंबर 1984 को हुए पिता-पुत्र की हत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। इस घटना में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या हुई थी।
इस मामले में सज्जन कुमार पर हिंसा के दौरान भीड़ को उकसाने का आरोप था। अदालत ने उन्हें दंगा करने, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने, हत्या और अन्य संबंधित अपराधों की धाराओं के तहत दोषी माना था। मामले की सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया गया और इसके बाद उन्हें दोषी करार दिया गया।
फरवरी 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने सज्जन कुमार को इस मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया, जहां वह अपनी सजा काट रहे थे। 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में यह उनके खिलाफ सुनाई गई महत्वपूर्ण सजा में शामिल थी।
इससे पहले भी सज्जन कुमार को 1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। वर्ष 2018 में उन्हें पांच सिखों की हत्या और एक धार्मिक स्थल को आग लगाए जाने से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस दोषसिद्धि के बाद उनके राजनीतिक जीवन को भी बड़ा झटका लगा था।
सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति की शुरुआत की। शुरुआती दौर में वह दिल्ली नगर निगम के पार्षद बने और बाद में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। धीरे-धीरे दिल्ली की राजनीति में उनका प्रभाव बढ़ता गया और वह कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।
सज्जन कुमार वर्ष 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा सांसद चुने गए। वह संजय गांधी के करीबी नेताओं में माने जाते थे। कई वर्षों तक उन्होंने दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण राजनीतिक पहचान बनाई।
वर्ष 2018 में 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषसिद्धि के बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनका सार्वजनिक जीवन मुख्य रूप से दंगा मामलों में चल रही न्यायिक प्रक्रिया और सजा से जुड़ा रहा।
सज्जन कुमार के निधन के साथ उनके लंबे राजनीतिक सफर और 1984 के दंगा मामलों से जुड़े कानूनी घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। उनके निधन की खबर के बाद परिवार और समर्थकों के बीच शोक का माहौल है।
