August 20, 2026

निवेशकों के लिए अहम दिन 20 अगस्त को बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी के लिए इन स्तरों पर रहेगी नजर

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नई दिल्ली। 20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल काफी अहम रहने वाला है। लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सेंसेक्स और निफ्टी में अब रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है। 19 अगस्त को सेंसेक्स 326 अंक गिरकर 76909.68 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 77 अंक फिसलकर 24078.30 पर पहुंच गया। निफ्टी लगातार सातवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ और इस दौरान इसमें करीब 2.1 प्रतिशत की कमजोरी आई।

बाजार में मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते दिखाई दे रहे हैं।

इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी भू राजनीतिक तनाव भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस मोर्चे पर तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर तनाव कम होने की कोई सकारात्मक खबर आती है तो बाजार में राहत की खरीदारी देखने को मिल सकती है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। ऊंची यील्ड की स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए विकसित बाजारों में पैसा लगाना अधिक आकर्षक हो सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सत्रों में बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली हैं।

19 अगस्त को बाजार में अधिकांश प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। हालांकि आईटी और फार्मा जैसे कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी। ऐसे में 20 अगस्त को निवेशकों की नजर सेक्टर आधारित प्रदर्शन पर भी रहेगी। मजबूत नतीजों और बेहतर कारोबारी संभावनाओं वाले शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर वैश्विक संकेतों वाले क्षेत्रों में दबाव कायम रह सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा दौर में निवेशकों को बाजार में जल्दबाजी से बड़े दांव लगाने के बजाय जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। लगातार गिरावट के बाद कुछ शेयर आकर्षक स्तर पर नजर आ सकते हैं लेकिन बाजार की दिशा पूरी तरह बदल गई है ऐसा मान लेना जल्दबाजी होगी। निफ्टी के 24000 के आसपास के स्तर पर निवेशकों की खास नजर रह सकती है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बाजार में और दबाव बन सकता है जबकि मजबूती की स्थिति में रिकवरी की कोशिश दिखाई दे सकती है।

कुल मिलाकर 20 अगस्त का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और पश्चिम एशिया से आने वाली खबरें बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की तेजी या गिरावट देखकर घबराहट में फैसला न लें और किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी जोखिम क्षमता तथा वित्तीय सलाह को ध्यान में रखें

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