August 20, 2026

फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

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नई दिल्ली ।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी घरेलू बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की कुछ अवधि वाली ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि वाली चुनिंदा बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरें 15 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से कम अवधि वाली बल्क एफडी पर किया गया है, जबकि लंबी अवधि की कई जमाओं की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

बैंक की ओर से किए गए बदलाव के तहत 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है। इसके अलावा 180 दिन से 210 दिन की अवधि वाली जमा पर ब्याज दर में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। इससे इन अवधि में बड़ी राशि एफडी के रूप में रखने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में कम ब्याज मिलेगा।

हालांकि 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि वाली 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैंक की नई बल्क एफडी दरें अलग-अलग अवधि के आधार पर 5.25 प्रतिशत से 6.50 प्रतिशत के बीच हैं। इसलिए बड़ी राशि को कम अवधि के लिए एफडी में लगाने वाले निवेशकों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

बल्क एफडी में किया गया यह बदलाव सामान्य एफडी ग्राहकों पर लागू नहीं होता। 3 करोड़ रुपये से कम की घरेलू जमा राशि पर बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि सामान्य ग्राहक जिनकी एफडी राशि इस सीमा से कम है, उनके मौजूदा ब्याज ढांचे पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

सामान्य एफडी में आम नागरिकों को अलग-अलग अवधि के आधार पर 3.05 प्रतिशत से 6.40 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दरें सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अवधि के अनुसार 3.55 प्रतिशत से 7.05 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। इस वजह से कम राशि वाली नियमित एफडी करने वाले ग्राहकों के लिए मौजूदा दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट और सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच राशि की सीमा महत्वपूर्ण होती है। बड़ी राशि जमा करने वाले ग्राहकों के लिए बैंक अलग दरें निर्धारित कर सकता है। ऐसे में निवेश से पहले संबंधित अवधि और लागू ब्याज दर को देखना जरूरी होता है। खास तौर पर छोटी अवधि की एफडी में मामूली दर बदलाव भी बड़ी जमा राशि पर मिलने वाले कुल ब्याज को प्रभावित कर सकता है।

एफडी को आमतौर पर निश्चित रिटर्न वाले निवेश विकल्प के रूप में देखा जाता है। ब्याज दर पहले से तय होने के कारण निवेशक को मैच्योरिटी तक संभावित रिटर्न का अनुमान लगाने में आसानी होती है। हालांकि अलग-अलग अवधि के लिए ब्याज दर अलग होती है और समय से पहले एफडी तोड़ने पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज या जुर्माने में बदलाव हो सकता है।

SBI की नई दरों का असर मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि को छोटी अवधि की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट में रखने की योजना बना रहे हैं। ऐसे निवेशकों के लिए एफडी बुक करने से पहले नई दरों और अवधि की तुलना करना उपयोगी होगा।

वहीं सामान्य ग्राहकों और 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि रखने वालों के लिए इस बदलाव से राहत है, क्योंकि उनकी एफडी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी मौजूदा नियमित एफडी दरें जारी हैं। इसलिए निवेशकों को अपनी जमा राशि, निवेश अवधि और लागू ब्याज दर के आधार पर फैसला लेना चाहिए।

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