MP में 24 घंटे खुलेंगे बाजार लेकिन 4 दिन की नौकरी का दावा कितना सही? नए कानून के 4 बड़े सवालों का पूरा सच
सबसे पहला सवाल यही है कि क्या अब मध्य प्रदेश में दुकानें और बाजार 24 घंटे खुले रह सकेंगे। नए कानून का मूल प्रावधान प्रतिष्ठानों के कामकाज के घंटों पर पहले जैसी सामान्य पाबंदी को हटाने से जुड़ा है। इसका मतलब यह है कि दुकान मॉल होटल रेस्टोरेंट और दूसरे पात्र प्रतिष्ठान जरूरत और कारोबारी मॉडल के मुताबिक रात में भी खुले रह सकते हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर दुकान को अनिवार्य रूप से 24 घंटे खुला रखना होगा। कारोबारियों को संचालन का विकल्प मिलेगा और सरकार सार्वजनिक व्यवस्था कर्मचारी कल्याण या कुछ विशेष श्रेणियों के लिए अलग नियम बना सकती है। खासतौर पर शराब जैसे कारोबारों को सामान्य दुकानों की तरह नहीं देखा जा सकता।
अब सबसे ज्यादा चर्चा चार दिन की नौकरी को लेकर है। यहां वायरल दावे को सावधानी से समझना जरूरी है। कानून में कर्मचारी के लिए अनिवार्य चार दिन का वर्क वीक लागू नहीं किया गया है। कर्मचारी से एक सप्ताह में निर्धारित 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता। लेकिन व्यवस्था में यह लचीलापन रखा गया है कि कर्मचारी की सहमति से साप्ताहिक काम के घंटे कम दिनों में पूरे किए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर कोई कर्मचारी अपनी इच्छा से चार दिन 12 घंटे काम करके 48 घंटे पूरे कर सकता है। लेकिन यह सामान्य या अनिवार्य व्यवस्था नहीं है। नियोक्ता किसी कर्मचारी को उसकी इच्छा के खिलाफ चार दिन में 48 घंटे काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। विधेयक की विधानसभा चर्चा में भी चार दिन में 48 घंटे काम करने की संभावना का उल्लेख किया गया था।
यानी 12 घंटे काम करने वाली बात भी आधी जानकारी के कारण भ्रम पैदा कर रही है। 12 घंटे की सीमा को हर कर्मचारी की रोजाना अनिवार्य ड्यूटी समझना गलत होगा। व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी को कुछ परिस्थितियों में अपनी सहमति से काम के घंटे अलग तरह से व्यवस्थित करने की सुविधा देना है। अगर तय साप्ताहिक सीमा से ज्यादा काम कराया जाता है तो ओवरटाइम से जुड़े प्रावधान लागू होंगे।
दूसरा बड़ा सवाल रात में बाजार खुलने से जुड़ा है। अगर कोई दुकान रातभर खुलती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस या प्रशासन के अधिकार खत्म हो जाएंगे। कानून व्यवस्था की समस्या हो या आग और सुरक्षा का खतरा हो या किसी दूसरे कानून का उल्लंघन हो रहा हो तो संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकते हैं। 24 घंटे कारोबार की अनुमति केवल संचालन के समय से जुड़ी सुविधा है। यह किसी कारोबारी को दूसरे कानूनों से छूट नहीं देती।
सरकार इस बदलाव के जरिए रात की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती है। बाजार देर रात तक चलने से होटल रेस्टोरेंट कैब डिलीवरी सुरक्षा पार्किंग और दूसरी सेवाओं में कारोबार बढ़ने की संभावना है। इंदौर जैसे शहरों में सराफा और 56 दुकान क्षेत्र की देर रात तक चलने वाली कारोबारी संस्कृति को इसके उदाहरण के तौर पर देखा जाता है। हालांकि केवल बाजार खोलने की अनुमति से रोजगार अपने आप नहीं बढ़ेगा। रात में ग्राहक और पर्याप्त कारोबारी गतिविधि होने पर ही इसका वास्तविक आर्थिक फायदा सामने आएगा। सरकार ने इस कानून को श्रम नियमों को सरल बनाने और कारोबार में अनावश्यक बाधाएं कम करने की दिशा में भी जोड़ा है।
महिलाओं की नाइट शिफ्ट को लेकर भी नए प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। महिला कर्मचारी की इच्छा के खिलाफ उसे रात की पाली में काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यदि महिला अपनी सहमति से नाइट शिफ्ट करती है तो नियोक्ता पर सुरक्षा और परिवहन जैसे इंतजाम की जिम्मेदारी होगी। यानी रात में काम करने की अनुमति के साथ सुरक्षित कार्यस्थल और आने जाने की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
कुल मिलाकर नए कानून का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर दुकान अनिवार्य रूप से 24 घंटे खुलेगी या हर कर्मचारी को चार दिन में 48 घंटे काम करना पड़ेगा। असली बदलाव यह है कि कारोबारियों को संचालन के समय में ज्यादा लचीलापन मिलेगा जबकि कर्मचारियों के साप्ताहिक काम के घंटे और सुरक्षा से जुड़े प्रावधान बने रहेंगे। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे 24 घंटे बाजार और 4 दिन की नौकरी वाले दावे को एक साथ जोड़कर देखना सही नहीं है।
