चमोली की जिस टनल में हुआ हादसा, आखिर किस प्रोजेक्ट का है हिस्सा? जानें 444 MW की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के 5 बड़े फायदे
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में गुरुवार शाम निर्माणाधीन सुरंग में मलबा और पानी घुसने से बड़ा हादसा हो गया। अचानक टनल में पानी और मलबा आने के कारण कई मजदूर अंदर फंस गए। राहत और बचाव दल ने करीब 13 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि बाकी मजदूरों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ NDRF, SDRF और मेडिकल टीम भी मौजूद है।
हादसे के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पहाड़ के भीतर इतनी बड़ी सुरंग क्यों बनाई जा रही थी? दरअसल, यह कोई सामान्य सड़क या आवाजाही की सुरंग नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की एक बड़ी जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है।
यह सुरंग 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना (VPHEP) के तहत बनाई जा रही है। आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट की खासियत और इससे होने वाले फायदे।
क्या है विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना?
विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही एक महत्वपूर्ण रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है।
इस परियोजना में अलकनंदा नदी के तेज बहाव और करीब 237 मीटर के हेड का इस्तेमाल कर बिजली पैदा की जाएगी। यह परियोजना ऋषिकेश से लगभग 225 किलोमीटर दूर NH-58 पर स्थित है।
परियोजना का निर्माण THDC इंडिया लिमिटेड कर रहा है, जबकि सुरंग निर्माण का काम HCC को दिया गया है। इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 444 मेगावाट है, जिसे 111-111 मेगावाट की चार यूनिट के जरिए हासिल किया जाएगा।
कैसे काम करेगा पूरा प्रोजेक्ट?
विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना को मुख्य रूप से तीन बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है।
1. 65 मीटर ऊंचा डायवर्जन डैम
अलकनंदा नदी के पानी को परियोजना की दिशा में मोड़ने के लिए करीब 65 मीटर ऊंचे कंक्रीट डायवर्जन डैम का निर्माण किया जा रहा है।
2. 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल
यह परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण सुरंगों में से एक है। करीब 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल के जरिए नदी का पानी बिजली उत्पादन के लिए टर्बाइन तक पहुंचाया जाएगा।
3. 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल
टर्बाइन से बिजली पैदा होने के बाद पानी को दोबारा अलकनंदा नदी में छोड़ने के लिए करीब 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल बनाई जा रही है।
पीपलकोटी में हुआ ताजा हादसा इसी जलविद्युत परियोजना के टनल निर्माण कार्य के दौरान हुआ है।
परियोजना के 5 बड़े फायदे
1. 444 मेगावाट बिजली का उत्पादन
परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि 444 मेगावाट बिजली उत्पादन होगी। इससे उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
2. नदी के बहाव से बिजली
यह रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है। यानी बिजली उत्पादन के लिए नदी के प्राकृतिक बहाव और ऊंचाई के अंतर का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह बड़े पैमाने पर पानी को लंबे समय तक रोककर रखने की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है।
3. स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
जलविद्युत को नवीकरणीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में गिना जाता है। परियोजना से बिजली उत्पादन बढ़ने पर कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
4. राज्य की ऊर्जा जरूरतों में मदद
444 मेगावाट की क्षमता वाली परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। इससे राज्य को बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
5. स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां
इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य, परिवहन, स्थानीय सेवाओं और दूसरे कारोबारों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
हादसे के बाद रेस्क्यू पर नजर
पीपलकोटी टनल हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल प्राथमिकता टनल के अंदर फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। NDRF, SDRF और अन्य बचाव दल मौके पर जुटे हैं और ऑपरेशन लगातार जारी है।
हालांकि यह परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन चमोली जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान मजदूरों की सुरक्षा, भूगर्भीय जोखिम और आपातकालीन बचाव व्यवस्था भी उतनी ही अहम हो जाती है।
