उत्तराखंड में बनेंगे 2 नए हाई-एल्टीट्यूड ट्रेकिंग सर्किट:नंदा देवी-त्रिशूल से चौखंबा तक दिखेंगी चोटियां
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6 दिन में 13 हजार फीट तक पहुंचेंगे ट्रेकर्स
उत्तराखंड में चारधाम और हिल स्टेशनों के बाद अब हाई-एल्टीट्यूड ट्रेकिंग को पर्यटन का नया आकर्षण बनाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने पिथौरागढ़ के 61.5 किमी लंबे राथन खारक और टिहरी-रुद्रप्रयाग के 44 किमी लंबे पनवाली कंथा ट्रेक को विकसित करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है।
दोनों ट्रेक को 6-6 दिन के सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। इन रूट्स पर ट्रेकर्स करीब 12,900 से 13,002 फीट की ऊंचाई तक पहुंचेंगे। इस दौरान उन्हें नंदा देवी, त्रिशूल, हरदेओल, बंदरपुंछ, काला नाग और चौखंबा जैसी हिमालयी चोटियों के विहंगम दृश्य देखने को मिलेंगे।
सरकार का मकसद सिर्फ ट्रेकिंग रूट को विकसित करना नहीं है। योजना के तहत स्थानीय गांवों को होमस्टे, गाइड, पोर्टर, भोजन, परिवहन और स्थानीय उत्पादों की बिक्री से जोड़कर रोजगार बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
हिमालय की चोटियों के बीच 6 दिन की ट्रेकिंग>
पिथौरागढ़ का राथन खारक ट्रेक नामिक से सरमुल्ली तक करीब 61.5 किमी लंबा होगा। इसे 6 दिन के ट्रेकिंग सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना है।
इस रूट का सबसे ऊंचा बिंदु करीब 12,900 फीट होगा। ट्रेकिंग के दौरान पर्यटकों को हिमालय की प्रमुख चोटियों के दृश्य दिखाई देंगे। इनमें नंदा देवी, त्रिशूल और हरदेओल प्रमुख हैं।
>दूसरा पनवाली कंथा ट्रेक टिहरी के कालीबागी से रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण तक विकसित किया जाएगा। यह करीब 44 किमी लंबा होगा।
>इसका सबसे ऊंचा पड़ाव 13,002 फीट की ऊंचाई पर पनवाली कंथा होगा। यहां से ट्रेकर्स को बंदरपुंछ, काला नाग और चौखंबा पर्वतमाला के शानदार नजारे देखने को मिलेंगे।
गांवों में बढ़ेंगे होमस्टे, गाइड और पोर्टर के काम>
सरकार इन ट्रेकिंग रूट्स को केवल एडवेंचर टूरिज्म तक सीमित नहीं रखना चाहती। योजना में स्थानीय समुदाय की सीधी भागीदारी का प्रावधान है।
>ट्रेकिंग सेंटरों पर पर्यटकों के लिए भोजन, ठहरने की सुविधा, स्मारिका दुकानें और अन्य जरूरी सहायता विकसित की जाएगी। इससे आसपास के गांवों में होमस्टे चलाने, ट्रेकिंग गाइड और पोर्टर के रूप में काम करने के अवसर बढ़ सकते हैं।
>इसके अलावा स्थानीय लोगों के बनाए उत्पादों की बिक्री, परिवहन और खान-पान से भी ग्रामीणों को आमदनी का नया जरिया मिल सकता है।
>ट्रेकिंग रूट के विकास में पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाएगा। परियोजना को वन विभाग के समन्वय से लागू करने की योजना है।
>पगडंडियों को मजबूत किया जाएगा, लेकिन उनके प्राकृतिक स्वरूप को यथासंभव बनाए रखने पर जोर रहेगा। पुराने पारंपरिक आश्रयों को हटाने के बजाय उनका जीर्णोद्धार कर दोबारा इस्तेमाल करने की योजना है।
>यानी नए निर्माण के बजाय मौजूदा प्राकृतिक और पारंपरिक ढांचे को बेहतर बनाने पर फोकस रहेगा।
स्वदेश दर्शन योजना के तहत केंद्र को भेजा प्रस्ताव
>पर्यटन सचिव धीराज गरब्याल के अनुसार, दोनों परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्र सरकार को स्वदेश दर्शन योजना के तहत भेजे गए हैं। परियोजनाओं में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना है।
>केंद्र से मंजूरी और आर्थिक सहायता मिलने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। राज्य स्तर पर कुछ प्रारंभिक कार्य शुरू करने की भी तैयारी है।
>उत्तराखंड में पर्यटन लंबे समय से चारधाम, धार्मिक स्थलों और प्रमुख हिल स्टेशनों के आसपास केंद्रित रहा है। अब सरकार हाई-एल्टीट्यूड ट्रेकिंग और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर पर्यटन का दायरा दूरस्थ पहाड़ी इलाकों तक पहुंचाना चाहती है।
>राथन खारक और पनवाली कंथा जैसे ट्रेक विकसित होने से पर्यटकों को नए ट्रैकिंग विकल्प मिलेंगे। साथ ही पहाड़ के दूरस्थ गांवों में पर्यटन आधारित रोजगार और स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार तैयार होने की उम्मीद है।
उत्तराखंड में ट्रैकिंग के लिए खुलेंगी नई पर्वत चोटियां: अगस्त तक नई पॉलिसी लाने की तैयारी, टूरिस्ट साइट्स की ऑनलाइन होगी बुकिंग
>उत्तराखंड में पहली बार कई नई पर्वत चोटियों को ट्रैकिंग के लिए खोला जाएगा। इसके लिए सरकार अगस्त तक नई ट्रैकिंग पॉलिसी लाने जा रही है। पॉलिसी के तहत नई ट्रैकिंग रूट विकसित करने के साथ जंगलों के भीतर ट्रैकिंग साइट्स, टूरिस्ट स्पॉट और वन विश्राम गृहों की बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन की जाएगी, ताकि तय क्षमता से अधिक पर्यटकों की एंट्री रोकी जा सके और इको-टूरिज्म को व्यवस्थित ढंग से बढ़ावा मिल सके।
