PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मीराबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की यात्रा में प्रधानमंत्री का लगातार सहयोग और प्रोत्साहन काफी महत्वपूर्ण है। मीराबाई ने लिखा कि मुलाकात के दौरान हर पदक विजेता के लिए पीएम मोदी के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द निश्चित तौर पर खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए और बेहतर तैयारी करने की प्रेरणा देंगे।
इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई के उस भावुक पल का भी जिक्र किया जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद पोडियम पर आंसू बहाए थे। प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि वह उस समय इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम मोदी ने मजाकिया और भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू निकल रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो।
मीराबाई ने इसके जवाब में अपने संघर्ष की पूरी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह बेहद खुश और भावुक थीं। उनकी आंखों से आंसू इसलिए भी निकल आए क्योंकि पेरिस ओलंपिक में वह महज एक किलो के अंतर से पदक जीतने से चूक गई थीं। इसके बाद के चार वर्षों में उन्होंने कई तरह की चुनौतियों का सामना किया। चोटों ने उनकी तैयारी को प्रभावित किया और परिवार में भी कई परेशानियां चलती रहीं। इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी फिटनेस तथा प्रदर्शन पर काम करती रहीं।
मीराबाई ने बताया कि जब वह कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ तो वह खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने कहा कि जब सामने देश का तिरंगा ऊपर उठता है और राष्ट्रगान बजता है तो भावनाएं अपने आप उमड़ पड़ती हैं। उनके लिए वह पल वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम था।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई ने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो भारतीय खेल जगत के लिए बेहद खास है। मीराबाई लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गई हैं।
मीराबाई की इस उपलब्धि के पीछे केवल उनकी ताकत और तकनीक ही नहीं बल्कि लंबे समय तक किया गया संघर्ष भी शामिल है। पेरिस ओलंपिक की निराशा, चोटों और निजी चुनौतियों के बाद उन्होंने जिस तरह वापसी की, वह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। प्रधानमंत्री से मुलाकात और उनके प्रोत्साहन के बाद मीराबाई ने भी संकेत दिया कि उनका लक्ष्य यहीं खत्म नहीं हुआ है। आने वाली प्रतियोगिताओं में वह और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरी मेहनत करेंगी और देश के लिए नए पदक जीतने की कोशिश जारी रखेंगी।
