सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को, 6 साल बाद बन रहे शुभ संयोग में जानें पूजा विधि और शिव आराधना का सही तरीका
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार सावन के दूसरे सोमवार का महत्व इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। उपलब्ध धार्मिक जानकारी के अनुसार, ऐसा शुभ संयोग करीब छह साल बाद बन रहा है। शिव भक्तों के लिए सोमवार और प्रदोष दोनों ही भगवान शिव की उपासना से जुड़े महत्वपूर्ण अवसर माने जाते हैं।
सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दूध या अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक भी कर सकते हैं।
पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, शमी, कनेर, धतूरा, चावल और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आराधना की जाती है। फल, पान, सुपारी और प्रसाद भी पूजा में शामिल किए जा सकते हैं। श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण और मंत्र जाप करते हैं।
भगवान शिव की पूजा में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप विशेष रूप से किया जाता है। इसे शिव का सरल और प्रमुख मंत्र माना जाता है। श्रद्धालु पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा के अनुसार कर सकते हैं।
सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का संयोग होने के कारण इस दिन शिव आराधना का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। प्रदोष व्रत भी भगवान शिव को समर्पित होता है और प्रदोष काल में शिव पूजा करने की परंपरा है। ऐसे में भक्त सोमवार की पूजा के साथ प्रदोष काल में भी भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।
इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जाता है। मंत्र है, “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥” धार्मिक मान्यताओं में इस मंत्र को भगवान शिव की उपासना से जुड़ा महत्वपूर्ण मंत्र माना गया है।
सावन सोमवार के अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे दिन सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा और भक्ति को महत्व दिया जाता है। इसलिए श्रद्धालु अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। व्रत रखने वाले लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए।
10 अगस्त का दूसरा सावन सोमवार इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि इस दिन सोमवार और प्रदोष व्रत का संयोग बताया जा रहा है। श्रद्धालु सुबह से शिव पूजा के साथ दिनभर भगवान शिव का स्मरण कर सकते हैं और प्रदोष काल में भी विधिपूर्वक आराधना कर सकते हैं।
