सरकार ने LIC में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री शुरू की, शेयर 8 प्रतिशत तक टूटने से बाजार में हलचल
सरकार ने एलआईसी में अपनी 2.5 प्रतिशत मूल हिस्सेदारी बिक्री के साथ 4 प्रतिशत तक का ग्रीनशू विकल्प भी रखा है। इस तरह कुल 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई है। इस हिस्सेदारी बिक्री से केंद्र सरकार को 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की उम्मीद है। यह सार्वजनिक क्षेत्र की किसी प्रमुख वित्तीय संस्था में सरकार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बिक्री में शामिल माना जा रहा है।
ऑफर फॉर सेल के लिए प्रति शेयर 382 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जो बाजार मूल्य से लगभग 10 प्रतिशत कम है। इसी वजह से बाजार खुलते ही एलआईसी के शेयर पर दबाव बढ़ गया और निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी। कारोबार के दौरान शेयर लगभग 390.70 रुपये तक फिसल गया। बाद में कुछ खरीदारी लौटने से गिरावट सीमित हुई, लेकिन शेयर दिनभर दबाव में ही कारोबार करता रहा।
शेयर में आई गिरावट का असर कंपनी के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी दिखाई दिया। एलआईसी का मार्केट कैप घटकर लगभग 5.03 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ओएफएस के दौरान फ्लोर प्राइस कम तय होने के कारण अल्पकालिक दबाव बनना सामान्य स्थिति है। हालांकि दीर्घकाल में कंपनी के प्रदर्शन और निवेशकों की भागीदारी पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
सरकार की ओर से यह ऑफर दो दिनों के लिए खोला गया है। पहले दिन गैर-खुदरा यानी संस्थागत निवेशकों को आवेदन का अवसर दिया गया है, जबकि दूसरे दिन खुदरा निवेशक भी इसमें भाग ले सकेंगे। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार अपनी हिस्सेदारी घटाने के साथ-साथ सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने के लक्ष्य को भी पूरा करना चाहती है।
वर्तमान में एलआईसी में केंद्र सरकार की लगभग 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। नियामकीय प्रावधानों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखना आवश्यक होता है। ऐसे में इस हिस्सेदारी बिक्री को उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य बाजार में अधिक सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ पूंजी जुटाना भी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की प्रतिक्रिया, ओएफएस को मिलने वाला प्रतिसाद और एलआईसी के शेयर का प्रदर्शन इस प्रक्रिया की सफलता तय करेगा। फिलहाल निवेशकों की नजर इस हिस्सेदारी बिक्री और इसके बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव पर बनी हुई है।
