दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज
महिला सुरक्षा डीएसपी शिखा सोनी के अनुसार नवविवाहिता की शिकायत पर महिला थाने में उसके पति मंगल सिंह उर्फ पुतुआ राजावत और ससुर सुरेश सिंह राजावत के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि विवाह के बाद दोनों ने कार और नकदी की मांग करते हुए महिला पर लगातार दबाव बनाया और प्रताड़ित कर उसे घर से निकाल दिया।
मामला दर्ज होने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था लेकिन जमानत मिलने के बाद वे फरार हो गए। इसके बाद से पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी रही। संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी गई लेकिन दोनों हर बार पुलिस को चकमा देकर स्थान बदल लेते थे।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए महिला थाना प्रभारी रश्मि भदौरिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम पिछले चार दिनों से गुजरात में संभावित ठिकानों पर लगातार कार्रवाई कर रही थी। दो दिन पहले पुलिस एक ऐसे ठिकाने पर पहुंची जहां आरोपी कुछ समय पहले तक रह रहे थे लेकिन वहां से वे निकल चुके थे। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड मिला जिसमें भिंड का पता दर्ज था। यही कार्ड जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ।
पुलिस ने तुरंत रणनीति बदलते हुए भिंड में निगरानी शुरू की और सोमवार रात कार्यक्रम स्थल पर दबिश दी। वहां दोनों आरोपी मौजूद मिले जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए हर कुछ महीनों में अपना ठिकाना बदल लेते थे और वर्षों बाद पहली बार किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने अपने गांव पहुंचे थे। इसी चूक की वजह से वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान किन लोगों ने दोनों आरोपियों को शरण दी और उन्हें पुलिस से बचाने में मदद की। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूरी कार्रवाई में एएसआई संतपाल सिंह, वीर सिंह राजावत, प्रधान आरक्षक असीम कृष्ण यादव, मुकेश यादव, आरक्षक अंकुर शर्मा, राजदीप जाट और महिला आरक्षक काजल जादौन की अहम भूमिका रही। पुलिस मंगलवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी सफलता मानी जा रही है और फरार आरोपियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई का अहम उदाहरण भी है।
