सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने टीएमसी छोड़ी, भाजपा और तृणमूल दोनों पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के महज चार माह के भीतर ही उन्होंने पार्टी से अलग होने का मन बना लिया। उन्होंने अप्रैल 2026 में तृणमूल का दामन थामा था। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा की कार्यशैली में कोई मौलिक अंतर नजर नहीं आता। दोनों ही दल जनहित के बुनियादी मुद्दों को किनारे कर केवल सत्ता केंद्रित राजनीति में लगे हुए हैं, जिससे आम जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं।
अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का जिक्र करते हुए चंद्र कुमार बोस ने कहा कि वे ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर चुके हैं। इन सभी राजनीतिक यात्राओं के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वर्तमान राजनीतिक ढांचा उनके जनसेवा के उद्देश्यों और सोच से मेल नहीं खाता। देश को इस समय समावेशी राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और वास्तविक सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देने वाली राजनीति की सख्त जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचार ही उनकी राजनीति का मुख्य आधार रहे हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वे एक नई राजनीतिक पहल की नींव रखेंगे। इस नए मंच का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना और राजनीति में नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना होगा। मध्य प्रदेश समेत देशभर के राजनीतिक हलकों में भी इस नए विचार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जहां समान विचारधारा वाले लोगों को एकजुट करने की तैयारी है।
उल्लेखनीय है कि चंद्र कुमार बोस ने वर्ष 2016 में भाजपा की सदस्यता ली थी। वे पार्टी के राज्य उपाध्यक्ष रहने के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी भी रहे। हालांकि, नीतियों से असहमति के चलते उन्होंने 2023 में भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अप्रैल 2026 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे, लेकिन यह साथ भी महज चार महीने ही चल सका। तृणमूल कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस इस्तीफे और बयानों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
