पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील
कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि संबंधित किशोरी स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि वह पहले कभी प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई पोस्ट या टिप्पणी नहीं करती थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के कहने पर उसने आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के सामाजिक और वैचारिक परिवेश पर ध्यान दें तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए सही दिशा प्रदान करें। उन्होंने अपने संदेश में कुछ वैचारिक समूहों की आलोचना करते हुए समाज से आत्ममंथन की भी अपील की।
यह विवाद उस समय सामने आया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और इसके संबंध में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई।
मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में एक महिला की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक और सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया। बाद में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मामला दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां संबंधित तथ्यों और शिकायत की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
विवाद के बीच 15 वर्षीय लड़की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस गई थी, जहां कुछ लोगों ने उसे आपत्तिजनक नारे और शब्द दोहराने के लिए उकसाया। उसने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और वह अपने व्यवहार को लेकर बेहद शर्मिंदा है। किशोरी ने देशवासियों से क्षमा मांगते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत मां के लिए भी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई बच्चा गुमराह होकर ऐसी गलती करता है तो उसे सही मार्ग दिखाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने ऐसे बच्चों को माफ करने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने की बात कही।
दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शन से जुड़े संगठन के प्रतिनिधियों ने इस मामले में दर्ज शिकायत पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अपमानजनक भाषा के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा रही है, तो सभी पक्षों के लिए समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। इस बीच, नाबालिग की माफी, कंगना रनौत की प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री की अपील ने इस मुद्दे को सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना दिया है।
