नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन पर दुनिया की नजर, शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से बढ़ सकती है कूटनीतिक सक्रियता
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी इसमें भाग लेने की उम्मीद जताई जा रही है। रूस की ओर से पहले ही उनकी भारत यात्रा के संकेत दिए जा चुके हैं। वहीं BRICS के नए सदस्य देशों में शामिल ईरान भी सम्मेलन में भाग लेगा, हालांकि उसकी ओर से किस स्तर का प्रतिनिधिमंडल आएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी शेष है।
यह सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषय इस बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों पर साझा रणनीति तैयार करने की दिशा में भी यह सम्मेलन अहम भूमिका निभा सकता है।
BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले महीने किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना भी जताई जा रही है। इस बैठक के दौरान रूस, चीन और ईरान सहित कई सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकातें हो सकती हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, संपर्क परियोजनाओं और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा होगी।
यदि शी जिनपिंग नई दिल्ली पहुंचते हैं, तो इसे भारत और चीन के बीच संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखने को मिला था। हालांकि हाल के समय में विभिन्न स्तरों पर संवाद जारी रहा है और संभावित शीर्षस्तरीय मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।
इस बीच वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में प्रस्तावित SCO शिखर सम्मेलन को लेकर भी चर्चा तेज है। पाकिस्तान के अध्यक्षता संभालने के बाद सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। ऐसे में भविष्य के क्षेत्रीय कूटनीतिक कार्यक्रमों को लेकर भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय मंच वैश्विक कूटनीति के केंद्र में रहेंगे। नई दिल्ली में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने का अवसर भी प्रदान कर सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें सदस्य देशों की आधिकारिक भागीदारी और संभावित द्विपक्षीय बैठकों पर टिकी हुई हैं।
