वीर सपूत को इंदौर का सलाम, मेजर हमजा आरिफ को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, हर आंख हुई नम
रविवार सुबह सैफी नगर में मेजर हमजा आरिफ की जनाजे की नमाज अदा की गई। इसके बाद भारतीय सेना के वाहन में तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के लिए रवाना हुआ। अंतिम यात्रा सैफी नगर से माणिकबाग पुल, कलेक्टर चौराहा, राजबाड़ा और सदर बाजार होते हुए इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंची। पूरे रास्ते शहरवासियों ने अपने वीर अधिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर हाथ जोड़कर नमन किया, जबकि अनेक लोगों ने सैल्यूट कर सम्मान व्यक्त किया।
राजबाड़ा पर अंतिम यात्रा के पहुंचते ही वातावरण देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। “भारत माता की जय” और “मेजर हमजा आरिफ अमर रहें” के नारों के बीच हजारों लोगों ने अपने वीर सपूत को अंतिम सलाम किया। शहरवासियों की भीड़ इस बात की गवाह बनी कि देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिक के प्रति समाज में कितना सम्मान और आदर है।
कब्रिस्तान में भारतीय सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अपने साथी अधिकारी को अंतिम सलामी अर्पित की। इसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी, समाजजन, रिश्तेदार और मित्र भी मौजूद रहे।
अंतिम विदाई का सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब मेजर हमजा आरिफ की पत्नी ज्योति अरोरा अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। कांपते हाथों से उन्होंने तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को नमन किया, लेकिन अपने आंसुओं को रोक नहीं सकीं। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सेना के अधिकारियों ने वह तिरंगा उन्हें सौंपा जिसमें मेजर हमजा आरिफ लिपटकर अपने घर लौटे थे। उन्होंने उस तिरंगे को सीने से लगाकर अपने जीवनसाथी को अंतिम विदाई दी। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
परिजनों ने बताया कि मेजर हमजा आरिफ का विवाह महज एक महीने पहले ही हुआ था। शादी के बाद वह कुछ दिनों की छुट्टी बिताकर अपनी ड्यूटी पर लौट गए थे। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि नई जिंदगी की शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद वह तिरंगे में लिपटकर अपने घर वापस आएंगे।
गौरतलब है कि गुरुवार देर रात राजस्थान के जैसलमेर जिले में ड्यूटी से लौटते समय सेना के वाहन के सामने अचानक एक ऊंट आ गया। टक्कर के बाद वाहन अनियंत्रित होकर कई बार पलट गया। हादसे में 31 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ का मौके पर ही निधन हो गया, जबकि उनके साथ मौजूद दो लेफ्टिनेंट गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का सैन्य अस्पताल में उपचार जारी है। नौ वर्षों तक भारतीय सेना में सेवाएं देने वाले मेजर हमजा आरिफ अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और तीन बहनों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका बलिदान केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे इंदौर और देश के लिए गर्व और भावनाओं का विषय बन गया है।
