बाजार में बढ़ी खरीदारी का असर, जुलाई में रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन से सरकार को बड़ी राहत
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई के दौरान घरेलू जीएसटी राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपए हो गया जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1.31 लाख करोड़ रुपए था। वहीं आयात पर मिलने वाले जीएसटी राजस्व में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई और इसमें 28.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आयात से प्राप्त जीएसटी संग्रह बढ़कर 66 हजार 511 करोड़ रुपए पहुंच गया। घरेलू और आयात दोनों स्रोतों से मजबूत राजस्व मिलने के कारण कुल सकल जीएसटी संग्रह 2.11 लाख करोड़ रुपए के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया।
सरकार ने बताया कि जुलाई के दौरान जीएसटी रिफंड में भी वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में रिफंड 13.1 प्रतिशत बढ़कर 29 हजार 968 करोड़ रुपए रहा। रिफंड समायोजित करने के बाद सरकार का शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.81 लाख करोड़ रुपए रहा जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.8 प्रतिशत अधिक है। घरेलू शुद्ध राजस्व 10.5 प्रतिशत बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया जबकि सीमा शुल्क से प्राप्त शुद्ध जीएसटी राजस्व में 30.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई और यह 54 हजार 223 करोड़ रुपए हो गया।
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान भी सरकार का कर संग्रह लगातार मजबूत बना हुआ है। इस अवधि में कुल सकल जीएसटी संग्रह 10.1 प्रतिशत बढ़कर 8.43 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 7.66 लाख करोड़ रुपए था। इससे स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार लगातार बनी हुई है और कर संग्रह में भी इसका सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।
इससे पहले जून 2026 में भी जीएसटी संग्रह 13.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.94 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया था। उस समय भी आयात से मिलने वाले राजस्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लगातार दो महीनों से मजबूत कर संग्रह यह संकेत देता है कि देश में उत्पादन व्यापार और उपभोग की गतिविधियां गति पकड़ रही हैं।
एसबीआई रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार यदि जीएसटी संग्रह और बेसिक एक्साइज ड्यूटी में राज्यों की हिस्सेदारी को एक साथ देखा जाए तो वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि आने वाले महीनों में जीएसटी संग्रह और मजबूत हो सकता है तथा पूरे वित्त वर्ष के दौरान इसमें 8 से 9 प्रतिशत की वृद्धि बनी रहने की संभावना है।
रिपोर्ट के मुताबिक हाल के महीनों में जीएसटी संग्रह की रफ्तार में जो हल्की नरमी देखने को मिली थी उसका प्रमुख कारण जीएसटी दरों का युक्तिकरण था जिसकी पहले से संभावना जताई जा रही थी। अब आर्थिक गतिविधियों में तेजी और कर संग्रह में लगातार सुधार से यह उम्मीद बढ़ गई है कि वित्त वर्ष के शेष महीनों में भी सरकार का राजस्व मजबूत रहेगा और इससे केंद्र तथा राज्यों दोनों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी।
