मेरठ में आस्था संग सेवा की मिसाल, नानी को कांवड़ में बैठाकर पदयात्रा कर रहा शिवभक्त
बैग में गंगाजल लेकर पैदल यात्रा
मथुरा के बलदेव थाना क्षेत्र के रहने वाले धीरेंद्र (27) वर्तमान में दिल्ली के राजनगर में अपने इंजीनियर भाई के साथ रहते हैं। वह 10 जुलाई को ट्रेन से हरिद्वार पहुंचे और 11 जुलाई से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा शुरू की।
धीरेंद्र ने गंगाजल को बैग में सुरक्षित रखा है और चरणबद्ध तरीके से यात्रा पूरी कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने 4 किलोमीटर, दूसरे दिन 18 किलोमीटर और तीसरे दिन 15 किलोमीटर की दूरी तय की। इसके बाद वह प्रतिदिन 10 से 12 किलोमीटर चलते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। यह उनकी हरिद्वार से गंगाजल लाने की लगातार तीसरी कांवड़ यात्रा है।
कांवड़ में नानी को बैठाकर निभा रहे सेवा का धर्म
नोएडा के सेक्टर-5 स्थित हरौला गांव निवासी हिमांशु चौहान अपनी 75 वर्षीय नानी रूपरानी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहे हैं। उनके साथ मौसेरे भाई प्रिंस राघव, बहन लक्ष्मी और परिवार के अन्य सदस्य भी यात्रा में शामिल हैं।
हिमांशु ने 19 जुलाई को हरिद्वार से यात्रा शुरू की। कांवड़ के एक हिस्से में करीब 45 किलोग्राम वजन की उनकी नानी बैठी हैं, जबकि दूसरे हिस्से में 55 लीटर गंगाजल से भरे कलश रखे गए हैं। लगभग एक क्विंटल वजन वाली इस कांवड़ को हिमांशु और प्रिंस राघव बारी-बारी से अपने कंधों पर उठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं ने किया जोरदार स्वागत
यात्रा के दौरान हिमांशु की बहन लक्ष्मी लगातार पंखे से दोनों भाइयों और अपनी नानी को हवा करती रहती हैं। मेरठ के पल्लवपुरम पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने इन शिवभक्तों का भव्य स्वागत किया। सेवा, समर्पण और शिवभक्ति का यह अनोखा संगम कांवड़ यात्रा में लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है।
