सीमा कालीरमन का बड़ा खुलासा, बोलीं- खेल का आनंद लिया, मेडल अपने आप मिल गया
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सीमा ने कहा कि पदक जीतने की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने परिणाम की चिंता छोड़कर खेल का आनंद लेना शुरू किया है, तभी से उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया है। उनके अनुसार यदि खिलाड़ी केवल अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दे तो सफलता अपने आप उसके कदम चूमती है।
सीमा ने यह भी बताया कि इस बार वह अपने चार साल के बेटे से दूर रहकर कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने आई थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि बेटे की याद उन्हें लगातार आती रही और उसका जिक्र होते ही वह भावुक हो जाती हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए पूरे फोकस के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और देश के लिए पदक जीतने में सफल रहीं।
उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का बड़ा श्रेय अपने पति और निजी कोच रविंदर कालीरमन को दिया। सीमा ने कहा कि पिछले वर्ष एशियन चैंपियनशिप में उनके पति साथ नहीं थे, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा था। लेकिन इस बार ग्लासगो में रविंदर की मौजूदगी ने उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति ने कभी उन पर पदक जीतने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि खेल का आनंद लो और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो। यही सलाह उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।
सीमा ने कहा कि एक खिलाड़ी की सफलता केवल मैदान पर दिखाई देने वाले प्रदर्शन तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे वर्षों का संघर्ष, त्याग और कठिन मेहनत छिपी होती है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को मानसिक दबाव, आर्थिक चुनौतियों और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि सही समय पर सहयोग और सुविधाएं मिलें तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम और ऊंचा कर सकते हैं।
उन्होंने सरकार से भी अपील की कि जिन युवाओं में खेलों के प्रति जुनून और प्रतिभा है, उन्हें शुरुआती स्तर से बेहतर प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उनका मानना है कि समय पर मिला समर्थन कई खिलाड़ियों के सपनों को साकार कर सकता है और भारत को भविष्य में और अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक दिला सकता है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में सीमा कालीरमन ने 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर कांस्य पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर की बड़ी सफलता है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उनके संघर्ष, समर्पण और सकारात्मक सोच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
