राष्ट्रपति मुर्मु ने बढ़ाया भारतीय खिलाड़ियों का हौसला, लवप्रीत और सीमा को दी शानदार जीत की बधाई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लवप्रीत सिंह को बधाई देते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतना उनकी मेहनत, दृढ़ संकल्प और शानदार प्रदर्शन का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि लवप्रीत की इस सफलता पर हर भारतीय को गर्व है और उन्हें उम्मीद है कि वह आने वाले वर्षों में भी देश के लिए नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।
राष्ट्रपति ने सीमा कालीरमन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतना सीमा की कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि सीमा की उपलब्धि देश की युवा महिलाओं को खेलों में आगे बढ़ने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन को भारतीय खेलों के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने लवप्रीत सिंह की ताकत, मेहनत और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि यह पदक उनकी निरंतर मेहनत का परिणाम है। वहीं सीमा कालीरमन के लिए उन्होंने कहा कि महिलाओं के डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साहस, दृढ़ निश्चय और संघर्ष की शानदार मिसाल पेश की है।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने लवप्रीत को 388 किलोग्राम कुल भार उठाकर रजत पदक जीतने पर बधाई दी और कहा कि उनका प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। वहीं सीमा कालीरमन के लिए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) पटियाला की इस एथलीट ने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सीमा कालीरमन को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीमा भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करती रहेंगी और देश को कई यादगार पल देंगी।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लवप्रीत सिंह और सीमा कालीरमन की सफलता केवल दो पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं। दोनों खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार प्रयास से अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।
