धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी
राज्यसभा में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सबसे अधिक वित्तीय सहायता मिली। इस राशि का उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में पेयजल आवास सड़क बिजली मोबाइल नेटवर्क शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना है। हालांकि जमीनी स्तर पर सभी योजनाओं का प्रदर्शन एक समान नहीं रहा।
नल जल योजना के तहत मध्य प्रदेश ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य के 11309 लक्षित गांवों में से 6112 गांवों तक नल से जल पहुंच चुका है जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर माना गया है। इसी तरह ग्रामीण आवास योजना में भी राज्य को सबसे अधिक 368395 मकानों की स्वीकृति मिली जिनमें से 152309 मकान बनकर तैयार हो चुके हैं। बिजली कनेक्शन के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज किया गया है और हजारों आदिवासी परिवारों तक बिजली पहुंचाई गई है।
मोबाइल नेटवर्क विस्तार के क्षेत्र में भी प्रगति देखने को मिली है। नेटवर्क विहीन 776 आदिवासी गांवों में से 571 गांवों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत हुई है। हालांकि इस क्षेत्र में भी अभी काफी काम बाकी है।
सबसे बड़ी चिंता सड़क निर्माण और छात्रावास परियोजनाओं को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 913 किलोमीटर लंबाई की 345 सड़कें स्वीकृत की गई थीं लेकिन अब तक एक भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसी तरह आदिवासी विद्यार्थियों के लिए 104 छात्रावासों की स्वीकृति और करोड़ों रुपए जारी होने के बावजूद एक भी छात्रावास का निर्माण पूरा नहीं हुआ। यह स्थिति दर्शाती है कि शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है।
इन कमियों के बावजूद राज्य ने एलपीजी गैस कनेक्शन वितरण में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। स्वीकृत दो लाख से अधिक कनेक्शनों में से लगभग चालीस हजार गैस कनेक्शन आदिवासी परिवारों तक पहुंचाए जा चुके हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन पशुधन विकास और अन्य आजीविका से जुड़ी योजनाओं में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं होता बल्कि योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है। यदि सड़क और छात्रावास जैसी बुनियादी परियोजनाओं में तेजी लाई जाए तो आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि जिन योजनाओं में काम पूरी तरह रुका हुआ है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि धरती आबा अभियान का वास्तविक लाभ आदिवासी समाज तक पहुंच सके।
