फिरोजाबाद में फ्लोराइड का कहर: गर्भ से नवजात तक असर, हर महीने 2 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की चपेट में
जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में 2,354 बच्चे कुपोषित और 559 बच्चे अति कुपोषित पाए गए। वहीं जून में यह संख्या क्रमशः 2,542 और 667 दर्ज की गई थी।
351 गांवों का भूजल फ्लोराइड से प्रभावित
जल जीवन मिशन के सर्वे के अनुसार, जिले के 790 गांवों में से 351 गांवों के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। कुछ क्षेत्रों में इसकी मात्रा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि सुरक्षित सीमा 1 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर मानी जाती है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में टूंडला, नारखी, हाथवंत, एका और जसराना ब्लॉक शामिल हैं। अगस्त 2023 में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली ‘हर घर नल से जल’ योजना शुरू होने के बावजूद अब तक प्रभावित क्षेत्रों को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।
विशेषज्ञ बोले- फ्लोराइड और पोषण की कमी दोनों जिम्मेदार
शिकोहाबाद संयुक्त चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के प्रभारी एवं सीएमएस डॉ. रमेश चंद केशव का कहना है कि फ्लोराइडयुक्त पानी गर्भवती महिलाओं के शरीर में कैल्शियम की कमी पैदा करता है, जिससे कमजोर और कम वजन वाले बच्चों का जन्म होता है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार की कमी और जन्म के बाद उचित पोषण न मिलना भी कुपोषण का बड़ा कारण है। वर्तमान में एनआरसी में सात कुपोषित बच्चों का इलाज चल रहा है।
इलाज से सुधर रही बच्चों की स्थिति
हाथवंत की निवासी प्रियंका देवी ने बताया कि उनके क्षेत्र में खारा और फ्लोराइडयुक्त पानी मिलता है। उनके बच्चे का जन्म के समय वजन केवल 1.8 किलोग्राम था, जो उपचार के बाद बढ़कर 3.8 किलोग्राम हो गया है। वहीं शिकोहाबाद की संगीता देवी ने बताया कि उनके छह माह के बेटे का जन्म के समय वजन 1.6 किलोग्राम था, जो अब बढ़कर 3.4 किलोग्राम हो चुका है।
पुष्टाहार वितरण भी बना चुनौती
जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार अधिकारी केसरी नंदन तिवारी ने बताया कि मेन्यू में बदलाव के कारण उत्पादन प्रभावित होने से पुष्टाहार की आपूर्ति बाधित हुई है। नतीजतन आंगनबाड़ी केंद्रों तक जून और जुलाई का पुष्टाहार नहीं पहुंच सका। जिले में 15,036 गर्भवती महिलाओं और 15,520 धात्री माताओं को इसका लाभ मिलना है।
जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2027
नमामि गंगे एडीएम मोहनलाल गुप्ता ने बताया कि ‘हर घर नल से जल’ योजना का कार्य दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बजट मिलने के बाद परियोजना पर काम दोबारा शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि फ्लोराइड प्रभावित गांवों में दोबारा पानी की जांच कराकर प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
सुरक्षित फ्लोराइड की सीमा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, पीने के पानी में फ्लोराइड की आदर्श मात्रा 1 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जबकि 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। अधिक मात्रा में फ्लोराइड हड्डियों, दांतों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के शारीरिक विकास पर गंभीर असर डाल सकता है।
