शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प
संजय राउत ने कहा कि उनके अनुसार देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फडणवीस शिक्षित और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेता हैं तथा उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान व्यवस्था में जिस तरह मंत्रालयों का बंटवारा किया जा रहा है, उस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
राउत ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि शिक्षा क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अनुभव वाले व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रह्लाद जोशी को उनके पहले के मंत्रालय में ही रहने दिया जाता तो अधिक उचित होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक मत है और इसे लेकर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
राज्यसभा सांसद ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी वह कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्री की भूमिका निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने अपने पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय जैसे अहम विभाग में ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है, जो नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके।
केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार समय-समय पर सामने आने वाले पेपर लीक जैसे मामलों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है।
राउत ने अपने बयान में केंद्र सरकार की नीतियों की भी आलोचना की और कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल मंत्रालय में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थानों की मजबूती और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं, जिनमें उन्होंने सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाए।
राजनीतिक हलकों में संजय राउत का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए उनके बयान को विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर एक और राजनीतिक हमला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
