July 29, 2026

मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है

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बाघों की धरती पर संरक्षण का नया संकल्प: मध्य प्रदेश ने एक हजार टाइगर की ओर बढ़ाए कदम

भोपाल । देश में सर्वाधिक बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को नए संकल्प के साथ दोहराया। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

उन्‍होंने कहा, वर्ष 2022 की गणना में 785 बाघों वाला मध्य प्रदेश अब आगामी गणना में एक हजार बाघों के आंकड़े के करीब पहुंचने की उम्मीद कर रहा है। इस अवसर पर रातापानी टाइगर रिजर्व का लोगो जारी किया गया, पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का लोकार्पण हुआ तथा वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने वाली अनेक पहलें सामने आईं।

बाघ संरक्षण में अग्रणी बना मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। प्रदेश की वन संपदा, संरक्षित क्षेत्र और वन विभाग के समर्पित प्रयासों ने बाघों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। वर्ष 2022 की बाघ गणना में प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और वर्तमान प्रयासों को देखते हुए अगली गणना में यह संख्या एक हजार के करीब पहुंचने की संभावना है। उन्होंने इसे वन विभाग, स्थानीय समुदायों और जनभागीदारी की बड़ी उपलब्धि बताया।

वन्यजीव संरक्षण को नई तकनीक और नई पहचान
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और संरक्षण कार्यों के लिए उपलब्ध कराए गए विशेष वाहनों का लोकार्पण किया। उन्होंने रातापानी टाइगर रिजर्व के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया तथा पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का शुभारंभ किया। जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े वृत्तचित्रों के टीजर जारी कर संरक्षण अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

प्रकृति संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल विचार
मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली भारतीय परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत सदियों से प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को जीवन का आधार मानता आया है। वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने का विचार भारतीय ज्ञान परंपरा में बहुत पहले से स्वीकार किया गया था। प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की यही भावना आज भी हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

भोपाल के आसपास बाघों की विशेष मौजूदगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ मानव आबादी के सबसे निकट सुरक्षित रूप से निवास करते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बाघों के साथ-साथ नदियों में घड़ियालों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियाल दूसरे राज्यों की ओर चले जाते थे, अब ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं जिससे उनका सुरक्षित संरक्षण मध्य प्रदेश में ही सुनिश्चित हो सके। हाथियों की आवाजाही से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

वन विभाग के कार्यों की सराहना
मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, फिर भी वन विभाग के साथ काम करने में उन्हें विशेष संतोष मिलता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान-प्रदान और संरक्षण सहयोग को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे जैव विविधता के संरक्षण को नई गति मिल रही है।

सम्मानित हुए वन संरक्षण के प्रहरी
इस अवसर पर वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने कहा कि अच्छा जंगल वही है, जहां बाघ, बाघिन और उनके शावक सुरक्षित हों। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण प्रकृति, जल स्रोतों और मानव जीवन की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। समारोह में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वन कर्मियों, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों तथा विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया।

इसके अलावा राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पद्मश्री सम्मानित सदस्यों का अभिनंदन भी किया गया। कार्यक्रम में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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