July 29, 2026

38 साल बाद भी बरकरार है इस सदाबहार गीत का जादू, शादी-ब्याह की हर रस्म में आज भी गूंजती है इसकी धुन

0
35-1785325823
नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के कई गीत समय के साथ केवल फिल्मी संगीत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा बन जाते हैं। वर्ष 1988 में रिलीज हुई फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ का लोकप्रिय गीत ‘साजन मेरा उस पार है’ भी ऐसे ही सदाबहार गीतों में शामिल है। रिलीज के करीब 38 वर्ष बाद भी यह गीत शादी-ब्याह, हल्दी, मेहंदी और महिला संगीत जैसे पारिवारिक आयोजनों में पूरे उत्साह के साथ गाया और बजाया जाता है।

इस गीत को अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि पर फिल्माया गया था, जो उस समय लगभग 24 वर्ष की थीं। उनके सहज अभिनय, पारंपरिक अंदाज और भावपूर्ण प्रस्तुति ने गीत को विशेष पहचान दिलाई। यही कारण है कि यह गीत केवल फिल्म का हिस्सा बनकर नहीं रह गया, बल्कि भारतीय शादियों की लोकप्रिय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन गया।

‘गंगा जमुना सरस्वती’ में अमिताभ बच्चन, मीनाक्षी शेषाद्रि, जया प्रदा और मिथुन चक्रवर्ती जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिकाओं में दिखाई दिए थे। फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं, लेकिन इसके इस गीत को शुरुआत से ही व्यापक लोकप्रियता मिली। समय बीतने के बावजूद इसकी लोकप्रियता में कोई खास कमी नहीं आई और यह आज भी नई पीढ़ी के बीच अपनी जगह बनाए हुए है।

गीत को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी थी। संगीतकार अनु मलिक ने इसकी धुन तैयार की, जबकि इसके बोल गीतकार इंद्रवीर ने लिखे थे। गीत की सरल भाषा, लोक संगीत से प्रेरित धुन और पारंपरिक माहौल इसे अन्य विवाह गीतों से अलग पहचान दिलाते हैं। यही वजह है कि यह गीत वर्षों बाद भी लोगों की पसंद बना हुआ है।

बदलते समय के साथ शादी समारोहों में डीजे, रीमिक्स और आधुनिक वेडिंग सॉन्ग्स का चलन तेजी से बढ़ा है। इसके बावजूद ‘साजन मेरा उस पार है’ की लोकप्रियता पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। विशेष रूप से गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में महिला संगीत की महफिलों में यह गीत आज भी पूरे उत्साह के साथ गाया जाता है। कई परिवारों में विवाह समारोह की शुरुआत इसी गीत से करने की परंपरा अब भी देखने को मिलती है।

इस गीत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी मानी जाती है। ढोलक की पारंपरिक थाप के साथ गाया जाने वाला यह गीत महिलाओं को सहज रूप से जोड़ देता है। इसमें न केवल विवाह की खुशी झलकती है, बल्कि पारिवारिक अपनापन और भारतीय लोक संस्कृति की मिठास भी महसूस होती है। यही कारण है कि यह गीत अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों को समान रूप से आकर्षित करता है।

संगीत विशेषज्ञों का भी मानना है कि कुछ गीत अपनी धुन, भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण समय की सीमाओं से आगे निकल जाते हैं। ‘साजन मेरा उस पार है’ भी उन्हीं गीतों में गिना जाता है जिसने दशकों बाद भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी है। आज भी जब शादी समारोहों में ढोलक की थाप सुनाई देती है तो यह गीत स्वतः लोगों की जुबान पर आ जाता है और पूरे माहौल को उत्सवमय बना देता है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *