बिना अनुमति सलमान खान की छवि के व्यावसायिक इस्तेमाल पर अदालत सख्त, 24 घंटे में कंटेंट हटाने के निर्देश
अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व के नाम, हाव-भाव, पहचान और छवि का उनकी सहमति के बिना व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि किसी प्रचार सामग्री से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, तो उसे पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है। अदालत के अनुसार प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री से यह प्रतीत होता है कि संबंधित फिल्म के प्रचार में अभिनेता की लोकप्रियता और पहचान का उपयोग दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि फिल्म का टीजर उन घटनाओं और पात्रों का उल्लेख करता है, जिनका संबंध काले हिरण शिकार मामले से जोड़ा गया है। यह मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। अदालत ने माना कि इस प्रकार की प्रस्तुति से अभिनेता की वर्षों में बनी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप को आवश्यक माना।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक व्यक्ति, विशेष रूप से सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को यह अधिकार प्राप्त है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग किस प्रकार और किन परिस्थितियों में किया जाएगा। बिना अनुमति किसी की पहचान का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री भी इसी सिद्धांत के दायरे में आती है और यदि उससे प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका हो तो न्यायिक संरक्षण उपलब्ध कराया जा सकता है।
अंतरिम आदेश के तहत फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया गया है कि वे टीजर और उससे संबंधित सभी प्रचार सामग्री को 24 घंटे के भीतर सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म, टेलीविजन, प्रिंट और अन्य माध्यमों से हटा दें। साथ ही उन्हें भविष्य में भी इस प्रकार की सामग्री को अपलोड, साझा, प्रकाशित या प्रचारित करने से रोका गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय के भीतर संबंधित सामग्री नहीं हटाई जाती है, तो संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवा प्रदाताओं को संबंधित यूआरएल हटाने की कार्रवाई करनी होगी।
यह मामला पर्सनैलिटी राइट्स और सार्वजनिक व्यक्तियों की पहचान के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े कानूनी पहलुओं को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का यह अंतरिम आदेश अंतिम निर्णय नहीं है, बल्कि मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी होने तक प्रभावी रहेगा। आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय अंतिम निर्णय देगा।
