16,086 मेगावाट क्षमता और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन के साथ पवन ऊर्जा में गुजरात सबसे आगे, केंद्र ने जारी किए आंकड़े
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान गुजरात ने पवन ऊर्जा से 33,706 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। यह देश के कुल पवन ऊर्जा उत्पादन का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। भारत की कुल पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता इसी अवधि में 57,443 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि पूरे देश में पवन ऊर्जा से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन दर्ज किया गया। इसमें गुजरात का योगदान सबसे अधिक रहा, जिससे राज्य की ऊर्जा क्षमता और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उसकी मजबूत स्थिति स्पष्ट होती है।
केंद्र सरकार का कहना है कि वर्ष 2030 तक देश की कुल बिजली आवश्यकता का 50 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी दिशा में गुजरात ने पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के विस्तार के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य में विकसित बुनियादी ढांचा, निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण और प्रभावी नीतियों के कारण स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हुआ है।
सरकार ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत नई ट्रांसमिशन लाइनें और सबस्टेशन विकसित किए गए हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बिजली ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके अलावा इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम शुल्क में दी गई राहत से निजी निवेश को बढ़ावा मिला है और नई परियोजनाओं की लागत कम करने में मदद मिली है।
पवन ऊर्जा क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए ‘नेशनल रिपावरिंग एंड लाइफ एक्सटेंशन पॉलिसी फॉर विंड पावर प्रोजेक्ट्स-2023’ लागू की गई है। इसके साथ ही ऑफशोर विंड एनर्जी लीज रूल्स-2023 और ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसी योजनाओं ने समुद्री क्षेत्रों में पवन ऊर्जा विकास के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। इन पहलों का लाभ गुजरात सहित कई राज्यों को मिल रहा है, हालांकि इस क्षेत्र में सबसे तेज प्रगति गुजरात ने दर्ज की है।
केंद्र सरकार के अनुसार गुजरात ने देश में सबसे पहले पवन ऊर्जा नीति लागू करने वाले राज्यों में शामिल होकर इस क्षेत्र के विकास की मजबूत नींव रखी थी। समय के साथ राज्य ने आधुनिक तकनीक, बेहतर ग्रिड प्रबंधन और निवेश समर्थक नीतियों के माध्यम से अपनी क्षमता में लगातार विस्तार किया। परिणामस्वरूप राज्य में पवन ऊर्जा उत्पादन लगातार बढ़ा है और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिली है।
सरकार का मानना है कि गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और टिकाऊ विकास को गति देने की दिशा में राज्य की यह उपलब्धि देश के ऊर्जा परिवर्तन अभियान को नई मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले वर्षों में पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार से भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद जताई गई है।
